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32 हजार नवजात मौत के मुंह में समा गए, कोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 12 Jan 2018 08:05 PM IST
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राजस्थान में नवजात बच्चों की मौत को लेकर पेश किए गए आंकड़ों पर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने असंतोष जताते हुए मौखिक फटकार लगाई है।
सीजे प्रदीप नन्द्राजोग और जस्टिस आरएस झाला कि खंडपीठ में आज स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर सरकार की ओर से प्रदेश में पन्द्रह माह में बत्तीस हजार नवजात बच्चो की मौत का आंकड़ा पेश किया गया था। सीजे नन्द्राजोग ने सरकार की ओर से पेश हुए एएजी कान्तिलाल ठाकुर के सहयोगी रिषभ ताहिल से पूछा कि इनकी मौत कैसे हुई और किन कारणों हुई। प्री-मेच्योर डिलिवरी से कितने की मौत हुई, कुपोषण से कितनी मौत हुई।
इस तरह से कुल सात बिंदुओं पर छह सप्ताह में पूरी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। सीजे ने न्यायमित्र राजवेन्द्र सारस्वत व कुलदीप वैष्णव से को भी निर्देश दिए हैं कि वे पता करें कि राजस्थान के आसपास के राज्यों से राजस्थान की क्या स्थिति है। हाईकोर्ट ने सरकार के आकड़ों पर नाराजगी जताई।
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सीजे प्रदीप नन्द्राजोग और जस्टिस आरएस झाला कि खंडपीठ में आज स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर सरकार की ओर से प्रदेश में पन्द्रह माह में बत्तीस हजार नवजात बच्चो की मौत का आंकड़ा पेश किया गया था। सीजे नन्द्राजोग ने सरकार की ओर से पेश हुए एएजी कान्तिलाल ठाकुर के सहयोगी रिषभ ताहिल से पूछा कि इनकी मौत कैसे हुई और किन कारणों हुई। प्री-मेच्योर डिलिवरी से कितने की मौत हुई, कुपोषण से कितनी मौत हुई।
इस तरह से कुल सात बिंदुओं पर छह सप्ताह में पूरी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। सीजे ने न्यायमित्र राजवेन्द्र सारस्वत व कुलदीप वैष्णव से को भी निर्देश दिए हैं कि वे पता करें कि राजस्थान के आसपास के राज्यों से राजस्थान की क्या स्थिति है। हाईकोर्ट ने सरकार के आकड़ों पर नाराजगी जताई।
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