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फर्टिलाइज़र कंपनियों को लगा झटका, कोर्ट ने सबकी याचिकाएं की खारिज
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 05 Dec 2017 04:15 PM IST
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- फोटो : Internet
राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्टिलाइजर कंट्रोल आॅर्डर 1985 का उल्लंघन करने पर फर्टिलाइजर कंपनियों को झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए इन प्रोडक्टस को हानिकारक फर्टिलाइजर की श्रेणी में डाला है।
जस्टिस एमएन भंडारी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि फर्टिलाइजर कंपनियों ने आॅर्डर 1985 का उल्लंघन किया है ऐसे में कृषि विभाग इन कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।
आपको बता दें कि इससे पहले कृषि विभाग द्वारा इन कंपनियों के फर्टिलाइजर प्रोडक्टस हानिकारक पाए जाने के कारण इन्हें नोटिस दिया गया था जिसके बाद सभी कंपनियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंपनियों का ये दावा था कि विभाग जिन प्रोडक्टस की बात कर रहा है वो फर्टिलाइजर्स की श्रेणी में ही नहीं आते जिसके बाद कोर्ट ने भी प्रोडक्टस की जांच के आदेश दिए थे।
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जांच में सभी प्रोडक्टस फर्टिलाइजर की ही श्रेणी में पाए गए जिसके बाद एएजी जगमोहन सक्सेना ने कृषि विभाग की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट से फर्टिलाइज उत्पादों को हानिकारक फर्टिलाइजर की श्रेणी में डालने की अपील की।
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जस्टिस एमएन भंडारी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि फर्टिलाइजर कंपनियों ने आॅर्डर 1985 का उल्लंघन किया है ऐसे में कृषि विभाग इन कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।
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आपको बता दें कि इससे पहले कृषि विभाग द्वारा इन कंपनियों के फर्टिलाइजर प्रोडक्टस हानिकारक पाए जाने के कारण इन्हें नोटिस दिया गया था जिसके बाद सभी कंपनियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंपनियों का ये दावा था कि विभाग जिन प्रोडक्टस की बात कर रहा है वो फर्टिलाइजर्स की श्रेणी में ही नहीं आते जिसके बाद कोर्ट ने भी प्रोडक्टस की जांच के आदेश दिए थे।
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जांच में सभी प्रोडक्टस फर्टिलाइजर की ही श्रेणी में पाए गए जिसके बाद एएजी जगमोहन सक्सेना ने कृषि विभाग की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट से फर्टिलाइज उत्पादों को हानिकारक फर्टिलाइजर की श्रेणी में डालने की अपील की।