{"_id":"593e9c061126f4c50b8b4977","slug":"rajasthan-highcourt-dismissed-the-petition-challenging-the-cancellation-of-the-election","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 12 Jun 2017 07:44 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : Internet
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के जयपुर नगर निगम वार्ड-9 के पार्षद पद के चुनाव परिणाम को अवैध घोषित करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि न तो याचिकाकर्ता हाजिर हुए और न ही उनकी ओर से पैरवी के लिए वकील पेश हुए। ऐसे में उनकी ओर से दायर अपील को खारिज किया जाता है।
न्यायाधीश डीसी सोमानी की एकलपीठ ने यह आदेश गत दिनों पार्षद दिनेश कावंट की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए दिए। अपील में कहा गया कि निचली अदालत ने चुनाव के अन्य प्रत्याशी नटवर गोपाल के अवैध नामांकन स्वीकार करने के आधार पर चुनाव परिणाम को रद्द कर दिया था।
नटवर गोपाल के खाली शपथ पत्र पर जिस नोटेरी के हस्ताक्षर होना बताए गए हैं, उसके बयान निचली अदालत में दर्ज नहीं हुए। इसके अलावा नियमानुसार नामांकन के समय शपथ पत्र पेश करना भी जरूरी नहीं था।
विज्ञापन
याचिका में यह भी कहा गया कि दूसरे की गलती का दंड याचिकाकर्ता को क्यों भुगताया जा रहा है। याचिकाकर्ता को 25 नवंबर 2014 को 64 मतों से विजयी घोषित किया गया था। ऐसे में निचली अदालत की ओर से रद्द किए गए चुनाव परिणाम को बहाल किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने गत 17 सितंबर को निचली अदालत के चुनाव रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन
न्यायाधीश डीसी सोमानी की एकलपीठ ने यह आदेश गत दिनों पार्षद दिनेश कावंट की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए दिए। अपील में कहा गया कि निचली अदालत ने चुनाव के अन्य प्रत्याशी नटवर गोपाल के अवैध नामांकन स्वीकार करने के आधार पर चुनाव परिणाम को रद्द कर दिया था।
विज्ञापन
नटवर गोपाल के खाली शपथ पत्र पर जिस नोटेरी के हस्ताक्षर होना बताए गए हैं, उसके बयान निचली अदालत में दर्ज नहीं हुए। इसके अलावा नियमानुसार नामांकन के समय शपथ पत्र पेश करना भी जरूरी नहीं था।
विज्ञापन
याचिका में यह भी कहा गया कि दूसरे की गलती का दंड याचिकाकर्ता को क्यों भुगताया जा रहा है। याचिकाकर्ता को 25 नवंबर 2014 को 64 मतों से विजयी घोषित किया गया था। ऐसे में निचली अदालत की ओर से रद्द किए गए चुनाव परिणाम को बहाल किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने गत 17 सितंबर को निचली अदालत के चुनाव रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।