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बाण गंगा नदी में अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 19 Sep 2017 07:38 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा जिले से बहकर पार्वती नदी में मिलने वाली बाण गंगा नदी में अतिक्रमण को लेकर राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख भूजल संसाधन सचिव और कृषि सचिव सहित दौसा कलक्टर को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश खेमकरण सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि चान्दराणा गांव स्थित बाणगंगा नदी के बहाव क्षेत्र को साढ़े तीन सौ फीट लंबी और 18 फीट ऊंची दीवार बनाकर रोका गया है। जिसके चलते आगे के इलाकों में पानी की एक बूंद भी नहीं जा पाती। ऐसे में धौलपुर के कई इलाकों में भू जल संकट पैदा हो गया है। यहां पानी की गहराई पांच सौ फीट से नीचे चला गया है।
याचिका में यह भी कहा गया कि नदी में अतिक्रमण से किसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों व पेड़-पौधों के अस्तित्व पर संकट आ गया है। इस संबंध में अदालती आदेश पर राजस्व सचिव के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया गया था, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश खेमकरण सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि चान्दराणा गांव स्थित बाणगंगा नदी के बहाव क्षेत्र को साढ़े तीन सौ फीट लंबी और 18 फीट ऊंची दीवार बनाकर रोका गया है। जिसके चलते आगे के इलाकों में पानी की एक बूंद भी नहीं जा पाती। ऐसे में धौलपुर के कई इलाकों में भू जल संकट पैदा हो गया है। यहां पानी की गहराई पांच सौ फीट से नीचे चला गया है।
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याचिका में यह भी कहा गया कि नदी में अतिक्रमण से किसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों व पेड़-पौधों के अस्तित्व पर संकट आ गया है। इस संबंध में अदालती आदेश पर राजस्व सचिव के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया गया था, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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