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गुर्जर आरक्षण: सरकार से नहीं बनी बात, अपनी मांग पर अड़े गुर्जर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 09 Jun 2017 03:34 PM IST
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राजस्थान सचिवायल
- फोटो : Amar Ujala
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राजस्थान में गुर्जरों को अलग से पांच फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को मंत्रिमंडलीय उपसमिति के साथ गुर्जर नेताओं की बैठक बेनतीजा रही। राज्य सरकार की ओर से पांच फीसदी आरक्षण के लिए विधानसभा में नया विधेयक लाए जाने के आश्वासन पर सवाल उठाते हुए गुर्जर नेता अपनी मांग पर अड़े रहे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राजमंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ की अध्य्क्षता में आयोजित बैठक में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी, सामान्य प्रशासन मंत्री हेमसिंह भड़ाना, गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, हिम्मत सिंह गुर्जर समेत अन्य बैठक में मौजूद थे। मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी नौकरियों में गुर्जरों को पांच फीसदी अलग से आरक्षण दिए जाने को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस भरोसा नहीं दिए जाने पर बातचीत का निर्णय नहीं निकला। इस संबंध में अब 16 जून को फिर बैठक होगी। गुर्जरों की इस मांग को लेकर कानूनी पहलुओं पर विचार कर सरकार की ओर से इस बैठक में अपना मत स्पष्ट किया जाएगा।
हालांकि शुक्रवार को आयोजित बैठक में सरकार की ओर से गुर्जरों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने के लिए जून या जुलाई में नया विधेयक लाने की बात कही गई, लेकिन गुर्जर नेताओं ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते इस नए विधेयक की मान्यता पर सवाल उठाया।
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ग्रामीण विकास एवं पंचायती राजमंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ की अध्य्क्षता में आयोजित बैठक में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी, सामान्य प्रशासन मंत्री हेमसिंह भड़ाना, गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, हिम्मत सिंह गुर्जर समेत अन्य बैठक में मौजूद थे। मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी नौकरियों में गुर्जरों को पांच फीसदी अलग से आरक्षण दिए जाने को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस भरोसा नहीं दिए जाने पर बातचीत का निर्णय नहीं निकला। इस संबंध में अब 16 जून को फिर बैठक होगी। गुर्जरों की इस मांग को लेकर कानूनी पहलुओं पर विचार कर सरकार की ओर से इस बैठक में अपना मत स्पष्ट किया जाएगा।
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हालांकि शुक्रवार को आयोजित बैठक में सरकार की ओर से गुर्जरों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने के लिए जून या जुलाई में नया विधेयक लाने की बात कही गई, लेकिन गुर्जर नेताओं ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते इस नए विधेयक की मान्यता पर सवाल उठाया।
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