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पहले रूस फिर फ्रांस और अब ब्रिटिश सैनिक क्यों पहुंचे हैं इस फायरिंग रेंज में...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:41 AM IST
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ब्रिटिश आर्मी दल
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अपने आप को सुपर पावर कहलाने वाले देश भी भारतीय सेना का लोह मानते हैं। इसी का नतीजा है कि रूस और फ्रांस सरीखे देशों की सेनाएं भी भारतीय सेना के साथ युद्धाभ्यास कर चुकी हैं।
अब इसी क्रम में ब्रिटेन के सैनिक भी बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगे। इस युद्धाभ्यास को अजय वॉरियर-2017 नाम दिया गया है। एक दिसंबर से प्रारंभ हो रहे इस युद्धाभ्यास भारत और ब्रिटेन के 120 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
ब्रिटिश सैनिक बुधवार सुबह विशेेष विमान से जयपुर पहुंचे और शाम को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचे। यहां भारतीय सेना ने उनका शानदार स्वागत किया।
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अब इसी क्रम में ब्रिटेन के सैनिक भी बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगे। इस युद्धाभ्यास को अजय वॉरियर-2017 नाम दिया गया है। एक दिसंबर से प्रारंभ हो रहे इस युद्धाभ्यास भारत और ब्रिटेन के 120 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
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ब्रिटिश सैनिक बुधवार सुबह विशेेष विमान से जयपुर पहुंचे और शाम को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचे। यहां भारतीय सेना ने उनका शानदार स्वागत किया।
पहले भी हो चुके है संयुक्त युद्धाभ्यास
फाइल फोटो।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेज महत्सवपूर्ण युद्धाभ्यास का गवाह बन चुकी है। वर्ष 2016 में भारत और फ्रांस के सैनिकों ने भी यहां संयुक्त युद्धाभ्यास किया था।
इस युद्धाभ्यास को शक्ति-2016 नाम दिया गया था। इसी वर्ष में भारतीय सेना का भी यहां युद्धाभ्यास हुआ था। जिसे शत्रुजीत 2016 नाम दिया गया था। बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज काफी अहम मानी जाती है।
इस युद्धाभ्यास को शक्ति-2016 नाम दिया गया था। इसी वर्ष में भारतीय सेना का भी यहां युद्धाभ्यास हुआ था। जिसे शत्रुजीत 2016 नाम दिया गया था। बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज काफी अहम मानी जाती है।
सहयोग के लिहाज से महत्वूर्ण
फाइल फोटो।
वहीं वर्ष 2013 में महाजन फील्ड फायरिंग में भारत और रूस की सेनाएं भी संयुक्त अभ्यास कर चुकी हैं। इस युद्धाभ्यास को इन्द्र 2013 नाम दिया गया था।
गौरतलब है कि संयुक्त युद्धाभ्यास को बीते चार वर्षों में काफी तरजीद दी जा रही है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इसलिए सहयोगी देशों के साथ युद्धाभ्यास करने से सामरिक रणनीति मजबूत होती है।
गौरतलब है कि संयुक्त युद्धाभ्यास को बीते चार वर्षों में काफी तरजीद दी जा रही है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इसलिए सहयोगी देशों के साथ युद्धाभ्यास करने से सामरिक रणनीति मजबूत होती है।