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कलक्टर साहब को मिली ये सजा, हर कोई रह गया दंग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 01 Sep 2017 07:13 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने टोंक जिले की पलाई ग्राम पंचायत में अदालती आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने के मामले में पेश जिला कलक्टर की बयानबाजी को अवमानना माना है। इसके साथ ही अदालत ने कलक्टर को कोर्ट उठने तक न्यायालय कक्ष में रहने की सजा दी।
अदालत ने कहा कि उन्हें न्यायालय की अवमानना करने पर दंडित भी किया जा सकता है। आदेश लिखाने के बाद कलक्टर की ओर से बिना शर्त माफी मांगने पर अदालत ने उनकी सजा को स्थगित करते हुए जाने की अनुमति दी। इसके साथ ही अदालत ने एसीएस सुदर्शन सेठी सहित अन्य सभी अवमाननकर्ताओं को 7 सितंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मनीष भंड़ारी की एकलपीठ ने यह आदेश पलाई ग्राम पंचायत की सरपंच रामभरोसी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में टोंक कलक्टर सूबे सिंह सहित अन्य अधिकारी अदालत में पेश हुए। कलक्टर ने अदालत को बताया कि ग्राम पंचायत की इस भूमि पर किसान सेवा केन्द्र प्रस्तावित है, लेकिन वर्तमान में इस पर मोबाइल टावर लगा हुआ है। इसके अलावा भूमि के अतिक्रमण को हटाने का अधिकार ग्राम पंचायत को ही है। जिला कलक्टर इसमें सहयोग नहीं कर सकता। कलक्टर ने अदालत को यह भी कहा कि अदालती आदेश में सही व्याख्या नहीं हुई है। कलक्टर इस भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश नहीं दे सकता।
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अदालत ने कहा कि उन्हें न्यायालय की अवमानना करने पर दंडित भी किया जा सकता है। आदेश लिखाने के बाद कलक्टर की ओर से बिना शर्त माफी मांगने पर अदालत ने उनकी सजा को स्थगित करते हुए जाने की अनुमति दी। इसके साथ ही अदालत ने एसीएस सुदर्शन सेठी सहित अन्य सभी अवमाननकर्ताओं को 7 सितंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मनीष भंड़ारी की एकलपीठ ने यह आदेश पलाई ग्राम पंचायत की सरपंच रामभरोसी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
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सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में टोंक कलक्टर सूबे सिंह सहित अन्य अधिकारी अदालत में पेश हुए। कलक्टर ने अदालत को बताया कि ग्राम पंचायत की इस भूमि पर किसान सेवा केन्द्र प्रस्तावित है, लेकिन वर्तमान में इस पर मोबाइल टावर लगा हुआ है। इसके अलावा भूमि के अतिक्रमण को हटाने का अधिकार ग्राम पंचायत को ही है। जिला कलक्टर इसमें सहयोग नहीं कर सकता। कलक्टर ने अदालत को यह भी कहा कि अदालती आदेश में सही व्याख्या नहीं हुई है। कलक्टर इस भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश नहीं दे सकता।
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फिर ये कहा अदालत ने...
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कलक्टर ने न्यायालय के आदेश की वैधता पर ही सवाल उठा दिया है। उनका यह कथन ही अवमानना की श्रेणी में आता है। इसलिए उन्हें अदालत उठने तक कक्ष न छोड़ने के आदेश दिए जाते हैं।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गत 14 फरवरी को याचिकाकर्ताओं को आदेश दिए थे कि वे भूमि से अतिक्रमण हटाने के संबंध में कलक्टर को अभ्यावेदन पेश करें और कलक्टर अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई करे। अतिक्रमण नहीं हटने की स्थिति में अदालत ने कलक्टर को अभ्यावेदन पर पन्द्रह दिन में आदेश पारित करने को कहा था। वहीं पालना नहीं होने पर पेश अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गत दिनों अदालत ने कलक्टर और सीईओ सहित अन्य को 25 हजार रुपए के जमानती वारंट से तलब किया था।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गत 14 फरवरी को याचिकाकर्ताओं को आदेश दिए थे कि वे भूमि से अतिक्रमण हटाने के संबंध में कलक्टर को अभ्यावेदन पेश करें और कलक्टर अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई करे। अतिक्रमण नहीं हटने की स्थिति में अदालत ने कलक्टर को अभ्यावेदन पर पन्द्रह दिन में आदेश पारित करने को कहा था। वहीं पालना नहीं होने पर पेश अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गत दिनों अदालत ने कलक्टर और सीईओ सहित अन्य को 25 हजार रुपए के जमानती वारंट से तलब किया था।