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बिना नोटिस दिए पुलिस नहीं करे गिरफ्तारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 21 Jun 2017 08:39 PM IST
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जयपुर के अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-26 ने मारपीट और लज्जा भंग के मामले में बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश देते हुए जांच अधिकारी को कहा है कि वह भविष्य में सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत बिना नोटिस दिए गिरफ्तारी न करे।
अदालत ने यह आदेश दीपक धाभाई, कुलदीप और महेन्द्र गुर्जर की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिए। जमानत अर्जी में कहा गया कि गत पांच जून को पट्टा वितरण शिविर में स्थानीय महिला सरपंच से हुए झगड़े के बाद उसने सांगानेर सदर थाने में लज्जा भंग और मारपीट करने का मामला दर्ज कराया। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। अर्जी में कहा गया कि पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया। जबकि सात साल की सजा तक के आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी है। ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीआरपीसी की धारा 41ए की पालना नहीं करने के आधार पर आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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अदालत ने यह आदेश दीपक धाभाई, कुलदीप और महेन्द्र गुर्जर की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिए। जमानत अर्जी में कहा गया कि गत पांच जून को पट्टा वितरण शिविर में स्थानीय महिला सरपंच से हुए झगड़े के बाद उसने सांगानेर सदर थाने में लज्जा भंग और मारपीट करने का मामला दर्ज कराया। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। अर्जी में कहा गया कि पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया। जबकि सात साल की सजा तक के आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी है। ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीआरपीसी की धारा 41ए की पालना नहीं करने के आधार पर आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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