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जानलेवा प्लास्टिक अब सड़कों को यूं दे रहा नई जिंदगी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 28 May 2017 01:25 PM IST
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जानलेवा प्लास्टिक अब सड़कों को नई जिंदगी दे रहा है। प्लास्टिक के इस नए उपयोग से न केवल सड़कों की दशा बदल रही है बल्कि उनकी गुणवत्ता और लाइफ में भी बढ़ोतरी हो रही है। राजस्थान में भी इस तरह की अनोखी सड़कों का निर्माण जोरों से हो रहा है। अब तक सैकड़ों किलोमीटर की सड़कें बनाई जा चुकी है और कई प्लान में हैं।
प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक वेस्ट को इकट्ठा कर साफ किया जाता है। इसके बाद इस वेस्ट को कटिंग मशीन से 2 से 3 मिलीमीटर के टुकड़ों में काट दिया जाता है। इन कटे हुए टुकडों को गरम गिट्टी पर डाला जाता है जिससे यह प्लास्टिक गिट्टी पर पिघलकर चिपक जाता है। इसके बाद इस गरम गिट्टी पर डामर की परत चढ़ा दी जाती है और इसे सड़क पर बिछाने के लिए भेज दिया जाता है। इस प्रकार प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग से डामर की 8-15 प्रतिशत की बचत होती है। साथ ही वातावरण में कार्बन उत्सर्जन में कमी के कारण वातावरण भी साफ रहता है। सड़क परियोजना की निर्माण लागत में भी कमी आती है। प्लास्टिक वेस्ट से 3.375 मीटर चौड़ी 1 किमी लम्बी सड़क के निर्माण में प्लास्टिक की करीब 10 लाख थैलियों का निस्तारण हो जाता है।
वातावरण को दूषित करने वाले नॉन डिग्रेडेबल प्लास्टिक को सड़क निर्माण में उपयोग लेकर इसके खतरे को स्थायी रूप से दूर किया जा सकता है और साथ ही निर्माण की लागत में भी कमी लाई जा सकती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव सानिवि डी.बी.गुप्ता ने बताया कि राज्य में अब तक प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग से 549 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 156 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
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मुख्य अभियंता, पीएमजीएसवाई सी.एल.वर्मा ने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग के लिए वर्ष 2013-14 में जयपुर जिले के जनजाति व मरूस्थलीय क्षेत्र में एवं सामान्य क्षेत्र में दौसा जिले में प्लास्टिक वेस्ट से ग्रामीण सड़कों का निर्माण प्रारम्भ किया गया था। वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली की ओर से अब तक ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग किए जाने के लिए राज्य में 331 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत 1075 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए करीब 415 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई। इसके तहत 549 किमी सड़क निर्माण कर 156 करोड़ 62 लाख रुपए व्यय कर 124 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं।
वर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 3465 किलोमीटर सड़कों को बनाया जाना है जिसके तहत प्लास्टिक वेस्ट सहित अन्य नवाचार तकनीकों का उपयोग लगभग 500 किलोमीटर सड़कों में किया जाएगा।
जानें कहां- कहां बनी हैं प्लास्टिक से सड़कें
-बाडमेर जिले में परोडी नवाताला सड़क से मुसलमानों की ढाणी-(6 किलोमीटर)
-जोधपुर जिले में लोहावत जातावास सड़क से जाटों की ढाणी- (5 किलोमीटर)
-जिला उदयपुर में सम्पर्क सड़क अमरावत फला-(6 किलोमीटर)
-जिला सीकर खूड़ से करीरों की ढाणी-(7 किलोमीटर)
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प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक वेस्ट को इकट्ठा कर साफ किया जाता है। इसके बाद इस वेस्ट को कटिंग मशीन से 2 से 3 मिलीमीटर के टुकड़ों में काट दिया जाता है। इन कटे हुए टुकडों को गरम गिट्टी पर डाला जाता है जिससे यह प्लास्टिक गिट्टी पर पिघलकर चिपक जाता है। इसके बाद इस गरम गिट्टी पर डामर की परत चढ़ा दी जाती है और इसे सड़क पर बिछाने के लिए भेज दिया जाता है। इस प्रकार प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग से डामर की 8-15 प्रतिशत की बचत होती है। साथ ही वातावरण में कार्बन उत्सर्जन में कमी के कारण वातावरण भी साफ रहता है। सड़क परियोजना की निर्माण लागत में भी कमी आती है। प्लास्टिक वेस्ट से 3.375 मीटर चौड़ी 1 किमी लम्बी सड़क के निर्माण में प्लास्टिक की करीब 10 लाख थैलियों का निस्तारण हो जाता है।
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वातावरण को दूषित करने वाले नॉन डिग्रेडेबल प्लास्टिक को सड़क निर्माण में उपयोग लेकर इसके खतरे को स्थायी रूप से दूर किया जा सकता है और साथ ही निर्माण की लागत में भी कमी लाई जा सकती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव सानिवि डी.बी.गुप्ता ने बताया कि राज्य में अब तक प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग से 549 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 156 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
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मुख्य अभियंता, पीएमजीएसवाई सी.एल.वर्मा ने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग के लिए वर्ष 2013-14 में जयपुर जिले के जनजाति व मरूस्थलीय क्षेत्र में एवं सामान्य क्षेत्र में दौसा जिले में प्लास्टिक वेस्ट से ग्रामीण सड़कों का निर्माण प्रारम्भ किया गया था। वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली की ओर से अब तक ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट के उपयोग किए जाने के लिए राज्य में 331 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत 1075 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए करीब 415 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई। इसके तहत 549 किमी सड़क निर्माण कर 156 करोड़ 62 लाख रुपए व्यय कर 124 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं।
वर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 3465 किलोमीटर सड़कों को बनाया जाना है जिसके तहत प्लास्टिक वेस्ट सहित अन्य नवाचार तकनीकों का उपयोग लगभग 500 किलोमीटर सड़कों में किया जाएगा।
जानें कहां- कहां बनी हैं प्लास्टिक से सड़कें
-बाडमेर जिले में परोडी नवाताला सड़क से मुसलमानों की ढाणी-(6 किलोमीटर)
-जोधपुर जिले में लोहावत जातावास सड़क से जाटों की ढाणी- (5 किलोमीटर)
-जिला उदयपुर में सम्पर्क सड़क अमरावत फला-(6 किलोमीटर)
-जिला सीकर खूड़ से करीरों की ढाणी-(7 किलोमीटर)