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प्रेरकों को साढे सात हजार रुपए मासिक करें भुगतान
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 02 Jun 2017 07:47 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि पूर्व में दिए अदालती आदेश की पालना में याचिकाकर्ता प्रेरकों को साढे सात हजार रुपए मासिक अदा करे। अदालत ने वेतन की गणना मई 2016 से करते हुए बकाया भुगतान 5 जुलाई तक करने को कहा है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश बन्नू शर्मा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता आरके गौतम ने अदालत को बताया कि एकलपीठ ने ढाई हजार रुपए मासिक में काम कर रहे प्रेरकों को वर्ष 2014 में आदेश जारी कर न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने खंडपीठ में अपील की। खंडपीठ ने 11 मई 2016 को अपील खारिज करते हुए न्यूनतम वेतन अदा करने को कहा।
राज्य सरकार की ओर से आदेश की पालना नहीं करने पर याचिकाकर्ताओं की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि खंडपीठ के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एसएलपी लंबित है। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार को उच्चतम न्यायालय से किसी तरह का स्टे नहीं मिला है। ऐसे में खंडपीठ का आदेश प्रभावी है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को साढे सात हजार रुपए मासिक वेतन अदा करने के आदेश देते हुए इसकी गणना मई 2016 से करने को कहा है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश बन्नू शर्मा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता आरके गौतम ने अदालत को बताया कि एकलपीठ ने ढाई हजार रुपए मासिक में काम कर रहे प्रेरकों को वर्ष 2014 में आदेश जारी कर न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने खंडपीठ में अपील की। खंडपीठ ने 11 मई 2016 को अपील खारिज करते हुए न्यूनतम वेतन अदा करने को कहा।
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राज्य सरकार की ओर से आदेश की पालना नहीं करने पर याचिकाकर्ताओं की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि खंडपीठ के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एसएलपी लंबित है। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार को उच्चतम न्यायालय से किसी तरह का स्टे नहीं मिला है। ऐसे में खंडपीठ का आदेश प्रभावी है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को साढे सात हजार रुपए मासिक वेतन अदा करने के आदेश देते हुए इसकी गणना मई 2016 से करने को कहा है।
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