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मौत के बाद बर्खास्त पटवारी होगा 'बहाल'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 24 Jul 2017 08:31 PM IST
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एक पटवारी को उसकी मौत के बाद न्याय मिला है। इस पटवारी को फर्जीवाड़े के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पटवारी की मौत के बाद उसे न्याय दिलाते हुए उसके बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश लक्ष्मीनारायण त्यागी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्र शाह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता धौलपुर के विपुरपुर में पटवारी था। राज्य सरकार की ओर से उस पर फर्जीवाड़ा करने के 12 गंभीर आरोप लगाते हुए 1991 में बर्खास्त कर दिया गया।
उसकी ओर से विभागीय अपील करने पर अपीलीय अधिकारी ने उसे भी खारिज कर दिया। जिसे याचिका में चुनौती देते हुए कहा गया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें विभागीय जांच के दौरान पेश ही नहीं किए गए। तत्कालीन तहसीलदार भी जांच के दौरान हस्ताक्षर स्वयं के मान चुके हैं। ऐसे में उसके बर्खास्तगी आदेश को रद्द किया जाए। वहीं याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता की मौत हो गई।
इस पर उसके विधिक उत्तराधिकारियों ने पक्षकार बन याचिका की सुनवाई जारी रखी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए समस्त परिलाभ मृतक याचिकाकर्ता के आश्रितों को तीन माह में अदा करने को कहा है।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने पटवारी की मौत के बाद उसे न्याय दिलाते हुए उसके बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश लक्ष्मीनारायण त्यागी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्र शाह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता धौलपुर के विपुरपुर में पटवारी था। राज्य सरकार की ओर से उस पर फर्जीवाड़ा करने के 12 गंभीर आरोप लगाते हुए 1991 में बर्खास्त कर दिया गया।
उसकी ओर से विभागीय अपील करने पर अपीलीय अधिकारी ने उसे भी खारिज कर दिया। जिसे याचिका में चुनौती देते हुए कहा गया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें विभागीय जांच के दौरान पेश ही नहीं किए गए। तत्कालीन तहसीलदार भी जांच के दौरान हस्ताक्षर स्वयं के मान चुके हैं। ऐसे में उसके बर्खास्तगी आदेश को रद्द किया जाए। वहीं याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता की मौत हो गई।
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इस पर उसके विधिक उत्तराधिकारियों ने पक्षकार बन याचिका की सुनवाई जारी रखी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए समस्त परिलाभ मृतक याचिकाकर्ता के आश्रितों को तीन माह में अदा करने को कहा है।
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