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इलाज पर खर्च हुई राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 23 Sep 2017 06:37 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह सेवानिवृत्त याचिकाकर्ता की चिकित्सा को लेकर खर्च हुई राशि नौ फीसदी ब्याज सहित लौटाए। इसके साथ ही अदालत ने राशि का पुनर्भुगतान नहीं करने वाले सीकर कोषागार के अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने राज्य सरकार को छूट दी है कि वह चाहे तो संबंधित अधिकारी से पुनर्भुगतान की गई राशि की वसूली कर सकती है।
न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. रामेश्वरलाल दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता अनूप ढंड़ ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 1993 में सेवानिवृत्त हुआ था। राज्य सरकार ने 2009 में नियम बनाकर सेवानिवृत्त कर्मचारी को दी जाने वाली मेडिकल डायरी का हर साल नवीनीकरण करने का प्रावधान किया। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 12 सितंबर 2009 को ऑपरेशन कराया था।
जिसका खर्च करीब एक लाख 77 हजार रुपए आया, लेकिन सीकर कोषागार ने यह कहते हुए पुनर्भुगतान से इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता ने 22 सितंबर 2009 को मेडिकल डायरी का नवीनीकरण कराया। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने पूर्व में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 2009 के नियमों की जानकारी ही नहीं दी।
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इसके अलावा याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्त होने की तिथि को पुराने नियम ही लागू थे। ऐसे में उसकी चिकित्सीय खर्च की राशि का पुनर्भुगतान नहीं करना गलत है।
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न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. रामेश्वरलाल दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता अनूप ढंड़ ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 1993 में सेवानिवृत्त हुआ था। राज्य सरकार ने 2009 में नियम बनाकर सेवानिवृत्त कर्मचारी को दी जाने वाली मेडिकल डायरी का हर साल नवीनीकरण करने का प्रावधान किया। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 12 सितंबर 2009 को ऑपरेशन कराया था।
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जिसका खर्च करीब एक लाख 77 हजार रुपए आया, लेकिन सीकर कोषागार ने यह कहते हुए पुनर्भुगतान से इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता ने 22 सितंबर 2009 को मेडिकल डायरी का नवीनीकरण कराया। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने पूर्व में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 2009 के नियमों की जानकारी ही नहीं दी।
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इसके अलावा याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्त होने की तिथि को पुराने नियम ही लागू थे। ऐसे में उसकी चिकित्सीय खर्च की राशि का पुनर्भुगतान नहीं करना गलत है।