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आईएएस एवं अन्य अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 10 Jul 2017 07:38 PM IST
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महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-33 ने राजस्व मंडल से स्टे के बावजूद निजी भूमि के पट्टे जारी करने के मामले में तत्कालीन जेडीसी शिखर अग्रवाल, सहायक नगर नियोजक और जेडीए जोन 17 के अन्य अधिकारियों सहित मित्र गृह निर्माण समिति व हरिओम विकास समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ करणी विहार थाने को मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने यह आदेश मीनावाला निवासी रामकरण मीणा की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में कहा गया कि परिवादी की मीनावाला में कुल 8 बीघा 15 बिस्वा भूमि है। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि परिवादी के नाम दर्ज है। वहीं इस संबंध में राजस्व मंडल से स्टे भी चल रहा है। परिवाद में कहा गया कि इस भूमि पर मित्र गृह निर्माण समिति ने पिछली तारीख में पट्टे काट दिए और पट्टाधारियों ने अपनी हरिओम विकास समिति बना ली। इसके बाद जेडीए के अफसरों से मिलीभगत कर योजना को अनुमोदित करवाकर जेडीए पट्टे हासिल कर लिए।
सोसायटी की ओर से 1988 के वर्ष में पट्टे काटना दिखाया गया, जबकि गिरदावर रिपोर्ट के अनुसार 2002 तक यहां खेती हो रही थी। परिवाद में कहा गया कि जेडीए अफसरों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर परिवादी की भूमि पर शिव विहार—सी के नाम से पट्टे वितरित कर दिए, जबकि यह भूमि परिवादी की खातेदारी भूमि है।
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अदालत ने यह आदेश मीनावाला निवासी रामकरण मीणा की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में कहा गया कि परिवादी की मीनावाला में कुल 8 बीघा 15 बिस्वा भूमि है। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि परिवादी के नाम दर्ज है। वहीं इस संबंध में राजस्व मंडल से स्टे भी चल रहा है। परिवाद में कहा गया कि इस भूमि पर मित्र गृह निर्माण समिति ने पिछली तारीख में पट्टे काट दिए और पट्टाधारियों ने अपनी हरिओम विकास समिति बना ली। इसके बाद जेडीए के अफसरों से मिलीभगत कर योजना को अनुमोदित करवाकर जेडीए पट्टे हासिल कर लिए।
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सोसायटी की ओर से 1988 के वर्ष में पट्टे काटना दिखाया गया, जबकि गिरदावर रिपोर्ट के अनुसार 2002 तक यहां खेती हो रही थी। परिवाद में कहा गया कि जेडीए अफसरों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर परिवादी की भूमि पर शिव विहार—सी के नाम से पट्टे वितरित कर दिए, जबकि यह भूमि परिवादी की खातेदारी भूमि है।
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