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पूर्व उपराष्ट्रपति के परिवार से जुड़े जमीन मामले में यथास्थिति के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 19 Feb 2018 05:46 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने गोविन्दगढ़ पंचायत समिति की चारागाह भूमि का भू-उपयोग बदलने और उस पर निर्माण को लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत के परिवार से जुड़े मामले में यथास्थिति के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश नरेन्द्र शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि मलिकपुर की पुराना खसरा नंबर 364 की 74 बीघा भूमि सम्वत् 2012 के गिरदावरी रिकॉर्ड में गोचर भूमि के रूप में दर्ज थी। तब से इस भूमि को श्मशान, स्कूलों के खेल मैदान सहित अन्य सार्वजनिक कामों में लिया जा रहा है। वहीं बाद में राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर इस भूमि का भू-उपयोग बदल कर अवैध रूप से कागजों में आवंटन किया गया।
इस भूमि में से 24 जुलाई 1968 को 57 बीघा जमीन की खातेदारी मोहनसिंह के पक्ष में की गई। मोहनसिंह ने 30 बीघा भूमि बेच दी। याचिका में कहा गया कि मोहनसिंह के वारिसों ने शेष 24 बीघा से अधिक भूमि का तीन चौथाई हिस्सा पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत की पत्नी सूरजकंवर को बेच दिया। सूरजकंवर की मौत होने पर यह भूमि नरपतसिंह राजवी के पुत्र विक्रमादित्य सिंह के नाम पर दर्ज हुई।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश नरेन्द्र शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि मलिकपुर की पुराना खसरा नंबर 364 की 74 बीघा भूमि सम्वत् 2012 के गिरदावरी रिकॉर्ड में गोचर भूमि के रूप में दर्ज थी। तब से इस भूमि को श्मशान, स्कूलों के खेल मैदान सहित अन्य सार्वजनिक कामों में लिया जा रहा है। वहीं बाद में राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर इस भूमि का भू-उपयोग बदल कर अवैध रूप से कागजों में आवंटन किया गया।
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इस भूमि में से 24 जुलाई 1968 को 57 बीघा जमीन की खातेदारी मोहनसिंह के पक्ष में की गई। मोहनसिंह ने 30 बीघा भूमि बेच दी। याचिका में कहा गया कि मोहनसिंह के वारिसों ने शेष 24 बीघा से अधिक भूमि का तीन चौथाई हिस्सा पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत की पत्नी सूरजकंवर को बेच दिया। सूरजकंवर की मौत होने पर यह भूमि नरपतसिंह राजवी के पुत्र विक्रमादित्य सिंह के नाम पर दर्ज हुई।
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ये भी कहा याचिका में
याचिका में कहा गया कि करीब एक साल पहले इस भूमि को बिल्डर्स को बेच दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि कलक्टर ने भी भूमि को चारागाह नहीं मानते हुए याचिकाकर्ता की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा गया। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद विवादित भूमि पर भूमाफियाओं ने निर्माण कार्य तेज गति से करना शुरू कर दिया है। ऐसे में मामले में यथास्थिति के आदेश दिए जाएं। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रकरण में यथास्थिति के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा गया। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद विवादित भूमि पर भूमाफियाओं ने निर्माण कार्य तेज गति से करना शुरू कर दिया है। ऐसे में मामले में यथास्थिति के आदेश दिए जाएं। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रकरण में यथास्थिति के आदेश दिए हैं।