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मंत्री भी हैं आरटीआई के दायरे में, नहीं बच सकते सूचना देने से
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 02 Oct 2017 03:02 PM IST
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राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण फैसला दिया है। आयोग ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि प्रदेश का कोई भी मंत्री और उसका कार्यालय जनता को सूचना प्राप्त करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि सूचना का अधिकार लागू हुए 12 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश के मंत्रियों के कार्यालयों से सूचना प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले आवेदक सूचना के अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे। ऐसे में मंत्रियों के विभागों में भी लोक सूचना अधिकारी आवश्यक है। सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने गौरीशंकर मालू की द्वितीय अपील पर यह फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि मंत्री और उनके कार्यालय संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत बने हुए हैं।
ऐसे में मंत्रियों के कार्यालयों में जो भी दस्तावेज संधारित होते हैं उनकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा सकती है। आयोग ने कहा कि मंत्रियों के विभाग से संबंधित दस्तावेज सीधे तौर पर वहां कार्यरत अधिकारियों के नियंत्रण में नहीं होते और वे इससे संबंधित सूचना आवेदकों को नहीं दे पाते।
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जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि सूचना का अधिकार लागू हुए 12 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश के मंत्रियों के कार्यालयों से सूचना प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले आवेदक सूचना के अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे। ऐसे में मंत्रियों के विभागों में भी लोक सूचना अधिकारी आवश्यक है। सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने गौरीशंकर मालू की द्वितीय अपील पर यह फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि मंत्री और उनके कार्यालय संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत बने हुए हैं।
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ऐसे में मंत्रियों के कार्यालयों में जो भी दस्तावेज संधारित होते हैं उनकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा सकती है। आयोग ने कहा कि मंत्रियों के विभाग से संबंधित दस्तावेज सीधे तौर पर वहां कार्यरत अधिकारियों के नियंत्रण में नहीं होते और वे इससे संबंधित सूचना आवेदकों को नहीं दे पाते।
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ये भी कहा आयोग ने...
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राज्य सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि मंत्रियों के कार्यालयों में भी राज्य लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपील अधिकारी पदाभिहित किए जाएं। यदि ऐसा नहीं होता है तो विभाग की वेबसाइट पर ये उल्लेख किया जाए कि मंत्रियों के कार्यालयों की सूचना कहां से प्राप्त की जा सकती है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता गौरीशंकर मालू ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री को जनहित से जुड़ी समस्या को लेकर ज्ञापन दिया था। इसके बाद मालू ने ज्ञापन पर हुई कार्यवाही को लेकर विभाग से सूचना मांगी थी, लेकिन उसे यह कहते हुए सूचना नहीं दी गई कि मंत्री कार्यालय से संबंधित दस्तावेज उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं रहते।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता गौरीशंकर मालू ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री को जनहित से जुड़ी समस्या को लेकर ज्ञापन दिया था। इसके बाद मालू ने ज्ञापन पर हुई कार्यवाही को लेकर विभाग से सूचना मांगी थी, लेकिन उसे यह कहते हुए सूचना नहीं दी गई कि मंत्री कार्यालय से संबंधित दस्तावेज उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं रहते।