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Board Exam : अब मैरिट लिस्ट नहीं निकलेगी, मिलेंगे मैडल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 22 Apr 2017 07:32 PM IST
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- फोटो : डेमो पिक
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रबंध मण्डल की बैठक में शनिवार को बड़े निर्णय लिए गए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण निर्णय ये रहा कि बोर्ड अब 2017 की परीक्षा में वरीयता सूची जारी नहीं करेगा।
दरअसल, बोर्ड प्रबंध मण्डल ने परीक्षा समिति के वर्ष 2017 की परीक्षा से योग्यता सूची जारी नहीं करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके तहत अब बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में स्थाई और अस्थाई योग्यता सूचियां जारी नहीं की जाएगी, बल्कि बोर्ड द्वारा आयोजित दीक्षान्त समारोह में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले प्रथम तीन विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए जाएंगे।
साथ ही, राज्य सरकार अथवा संस्थाओं द्वारा परीक्षार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप छात्रवृत्तियां, लेपटाॅप, गार्गी पुरस्कार आदि दिए जाने हेतु अंकों के आधार पर सूची उपलब्ध करा दी जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया कि परीक्षा 2018 से प्रायोगिक परीक्षा उसी जिले के राजकीय विद्यालय में सेवारत शिक्षकों से करवाई जाएगी। यदि किसी जिले में परीक्षकों की कमी है तो निकटतम जिले के राजकीय विद्यालय के शिक्षकों को नियुक्त कर परीक्षा करवाई जाऐगी। विशेष परिस्थितियों में राजकीय विद्यालयों को अध्यापकों की कमी होने की स्थिति में निजी विद्यालयों के अध्यापकों से परीक्षा करवाई जा सकती है।
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बोर्ड सचिव मेघना चौधरी ने बताया कि बोर्ड के घाटे में भी कमी आई है। वर्तमान बजट में 12.46 करोड़ रुपए का घाटा दर्शाया हुआ है जो कि गत वित्तीय वर्ष में 46 करोड़ रुपए था।
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दरअसल, बोर्ड प्रबंध मण्डल ने परीक्षा समिति के वर्ष 2017 की परीक्षा से योग्यता सूची जारी नहीं करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके तहत अब बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में स्थाई और अस्थाई योग्यता सूचियां जारी नहीं की जाएगी, बल्कि बोर्ड द्वारा आयोजित दीक्षान्त समारोह में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले प्रथम तीन विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए जाएंगे।
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साथ ही, राज्य सरकार अथवा संस्थाओं द्वारा परीक्षार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप छात्रवृत्तियां, लेपटाॅप, गार्गी पुरस्कार आदि दिए जाने हेतु अंकों के आधार पर सूची उपलब्ध करा दी जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया कि परीक्षा 2018 से प्रायोगिक परीक्षा उसी जिले के राजकीय विद्यालय में सेवारत शिक्षकों से करवाई जाएगी। यदि किसी जिले में परीक्षकों की कमी है तो निकटतम जिले के राजकीय विद्यालय के शिक्षकों को नियुक्त कर परीक्षा करवाई जाऐगी। विशेष परिस्थितियों में राजकीय विद्यालयों को अध्यापकों की कमी होने की स्थिति में निजी विद्यालयों के अध्यापकों से परीक्षा करवाई जा सकती है।
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बोर्ड सचिव मेघना चौधरी ने बताया कि बोर्ड के घाटे में भी कमी आई है। वर्तमान बजट में 12.46 करोड़ रुपए का घाटा दर्शाया हुआ है जो कि गत वित्तीय वर्ष में 46 करोड़ रुपए था।
ये भी लिए निर्णय
डेमो
- फोटो : डेमो
- मूल्यांकन में गुणवत्ता के लिए वर्ष 2018 की परीक्षा के लिए प्रत्येक परीक्षक को अधिकतम 360 उत्तरपुस्तिकाएं मूल्यांकन हेतु दिए जाने और जिन परीक्षकों ने वर्ष 2017 की उत्तरपुस्तिकाओं के बण्डल मूल्यांकन हेतु नहीं लिए हैं उनके विरुद्ध संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई हेतु सूचित करने के निर्देश दिए।
- जिन विद्यालयों ने 10 अक्टूबर 2016 तक स्थायी सम्बद्धता के लिए बोर्ड में आवेदन कर रखा है और उन विद्यालय के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में निरन्तर प्रविष्ट हो रहे हैं तो उन सभी विद्यालयों से सभी कार्यवाही पूर्ण करवाकर उनको स्थायी सम्बद्धता प्रमाण-पत्र जारी कर दिए जाएं।
- राज्य के सभी जिलों में बोर्ड के विद्यार्थी सेवा केन्द्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को अजमेर स्थित बोर्ड कार्यालय आने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
- बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष प्रो.बी.एल. चौधरी ने बताया कि बोर्ड के वर्तमान में 16 जिलों में विद्यार्थी सेवा केन्द्र संचालित हैं, जहां से विद्यार्थी वर्ष 2001 से 2017 तक की अंकतालिका और माईग्रेसन प्रमाण-पत्र आवेदन प्राप्त कर सकते हैं।