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नौ साल में 13 बार हड्डियां टूटी, मां भी गोद में लेने से डरती है

Sat, 15 Jul 2017 03:51 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 15 Jul 2017 03:51 PM IST
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Nine year old girl has serious illness
मासूम लक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
मैं पढ़ना चाहती हूं, खेलना भी चाहती हूं। खड़ी होने की कोशिश करती हूं तो पैरों की हड्डियां टूट जाती हैं। स्कूल में दाखिला नहीं मिल रहा, कहते है कौन रखेगा ध्यान? 
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यह दर्द राजस्थान के बाड़मेर में रहने वाली लक्ष्मी का है। मेहनत-मजदूरी से घर चलाने वाले जटियों का वास निवासी कांतिलाल जोशी के घर नौ साल पहले बेटी हुई तो उसने नाम लक्ष्मी रखा। बेटी जब एक साल की हुई, तो उसके पांव की एक हड्डी चटक गई। उपचार कराया तो राहत मिली। सब कुछ ठीक चल रहा था। तीन साल की उम्र हुई तो उसकी कमर से लेकर पैर तक की हड्डियां टूटने लगी। एक के बाद एक कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। 
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दरअसल लक्ष्मी की हड्डियां बीमारी की वजह से इतनी कमजोर है कि जरा सा जोर लगने पर वह चटक जाती है। इस वजह से वह चल-फिर नहीं पाती। यहां तक कि उसे गोदी में भी नहीं लिया जा सकता, इस डर से कि कही हड्डी नहीं टूट जाए। हालांकि हड्डियों के टूटने से उसको दर्द नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की सूजन आती है। वह अब नौ साल की हो चुकी है और इस दौरान उसकी 13 बार हड्डियां टूटी है। 
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दर्द इतना ही नहीं, यह भी है

Nine year old girl has serious illness
मासूम लक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्मी का दर्द इतना ही नहीं है। उसके पिता बेटी का ढंग से इलाज नहीं करा पाने का भी दर्द सह रहे है।

दरअसल, लक्ष्मी के पिता कांतिलाल मेहनत मजदूरी करके परिवार पाल रहे है। उनकी मासिक पगार मात्र दस हजार रुपए है, इसमें से तीन हजार मकान किराए और बाकी रुपए घर की जरुरतों पर खर्च हो जाते है। इसके बाद इलाज के लिए कुछ नहीं बचता। फिर भी पिता बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, सांचोर, गुजरात, जयपुर तक इलाज के लिए जा चुका है। 

चिकित्सक बस दवाएं देकर भेज देते हैं, लेकिन बीमारी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताते। पिता जब बेटी को लेकर वह पास के सरकारी स्कूल में गया तो वहां दाखिल करने से मना कर दिया। पिता काम पर चले जाते है तो मां उसका ध्यान रखती है। घर के काम काज के चलते कई बार वह भी उसका ध्यान नहीं रख पाती। ऐसे में उसने एक छोटा डॉगी उसके लिए खरीदा है। लक्ष्मी उसे जिगर के नाम से बुलाती हैं और पूरा दिन उसी के साथ रहती हैं। दूसरे बच्चे भी उसके पास नहीं आते। अपनी बीमारी से अनजान लक्ष्मी चंचल है और चेहरे पर हमेशा मासूम मुस्कान नजर आती है।

डॉक्टर ने कहा कि जेनेटिक है यह बीमारी

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मासूम लक्ष्मी - फोटो : अमर उजाला
राजकीय अस्पताल, बाडमेर के वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ सुरेन्द्र चौधरी  का कहना है कि मेडिकल साइंस में इस बीमारी को ऑस्टियोजिनिसस इम्परफेक्टा यानी अस्थि भंगुरता कहा जाता है। इस बीमारी में जरा सा भी जोर लगने पर हड्डियां टूट जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह जेनेटिक बीमारी है। इसमें एंजाइम मिसिंग के कारण हड्डियां चटकती है। 
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