{"_id":"5a4b8d9e4f1c1b1c198b46fc","slug":"mortal-remains-of-martyr-of-constable-rajendra-nen-buried-with-tribute-and-homage","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"2 साल की मासूम ने दी अपने शहीद पिता को मुखाग्नि, लोगों ने हाफिज सईद का पुतला फूंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2 साल की मासूम ने दी अपने शहीद पिता को मुखाग्नि, लोगों ने हाफिज सईद का पुतला फूंका
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 02 Jan 2018 07:31 PM IST
विज्ञापन
दो साल की मिष्टी ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए जांबाज राजेन्द्र नैण का आज उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार हुआ। उनकी दो वर्षीय बेटी मिष्टी ने मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद सबकी आंखें नम हो गई।
सीआरपीएफ में बी बटालियन 130 में तैनात राजेन्द्र नैण का आज चूरू जिले में स्थित उनके पैतृक गांव गौरीसर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को जब उनके शहीद होने की खबर गांव में पहुंची तो माहौल गमगीन हो गया था। आज सुबह जैसे ही राजेंद्र नैण की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव गौरीसर पहुंची जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के बड़ी संख्या में ग्रामीण,जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहें।
इससे पहले शहीद राजेन्द्र के शव पर देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, सीआरपीएफ अधिकारी, जिला कलक्टर ललित गुप्ता व जिला पुलिस अधीक्षक राहुल बारहट ने पुष्पचक्र अर्पित किए।
विज्ञापन
चूरू का लाल राजेन्द्र अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़कर देश के लिए कुर्बान हो गया। एक किसान का बेटा राजेन्द्र दो साल पहले ही सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था और श्रीनगर में उसकी पोस्टिंग हुई थी। राजेन्द्र के दो भाई और दो बहनें है जिनमें से एक बहन राजेन्द्र से छोटी है। राजेन्द्र की पत्नी प्रियंका गृहिणी है और उसकी बेटी मिष्टी अभी महज दो साल की ही है। जानकारी के अनुसार, राजेंद्र 20 दिन पहले ही 15 दिन की छुट्टियां बिताकर ड्यूटी पर गए थे।
विज्ञापन
सीआरपीएफ में बी बटालियन 130 में तैनात राजेन्द्र नैण का आज चूरू जिले में स्थित उनके पैतृक गांव गौरीसर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को जब उनके शहीद होने की खबर गांव में पहुंची तो माहौल गमगीन हो गया था। आज सुबह जैसे ही राजेंद्र नैण की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव गौरीसर पहुंची जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के बड़ी संख्या में ग्रामीण,जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहें।
विज्ञापन
इससे पहले शहीद राजेन्द्र के शव पर देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, सीआरपीएफ अधिकारी, जिला कलक्टर ललित गुप्ता व जिला पुलिस अधीक्षक राहुल बारहट ने पुष्पचक्र अर्पित किए।
विज्ञापन
चूरू का लाल राजेन्द्र अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़कर देश के लिए कुर्बान हो गया। एक किसान का बेटा राजेन्द्र दो साल पहले ही सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था और श्रीनगर में उसकी पोस्टिंग हुई थी। राजेन्द्र के दो भाई और दो बहनें है जिनमें से एक बहन राजेन्द्र से छोटी है। राजेन्द्र की पत्नी प्रियंका गृहिणी है और उसकी बेटी मिष्टी अभी महज दो साल की ही है। जानकारी के अनुसार, राजेंद्र 20 दिन पहले ही 15 दिन की छुट्टियां बिताकर ड्यूटी पर गए थे।
गुस्साए लोगों ने फूंका हाफिज सईद का पुतला
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़े लोग
- फोटो : Amar Ujala
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने 'राजेन्द्र अमर रहे' जैसे नारे लगे वहीं गांव के कुछ गुस्साए युवाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। आए दिन पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली घुसपैठ और सीजफायर के उल्लंघन जैसी घटनाओं पर लोगों ने अपना आक्रोश जताया वहीं पाकिस्तान में बैठे मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का पुतला भी फूंका।
सीआरपीएफ के डीआईजी जगदीश मीणा भी शहीद राजेन्द्र की अंतिम यात्रा में शरीक हुए और उन्होनें वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि आतंकवादियों के फिदायीन हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा था कि उसी दौरान आतंकवादियों से बहादुरी से लड़ते हुए जवान राजेन्द्र शहादत को प्राप्त हुआ, उसकी शहादत पर पूरे देश को गर्व है। देश के युवाओं में वतन के लिए जज्बा है जो कभी कम नहीं होगा।
सीआरपीएफ के डीआईजी जगदीश मीणा भी शहीद राजेन्द्र की अंतिम यात्रा में शरीक हुए और उन्होनें वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि आतंकवादियों के फिदायीन हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा था कि उसी दौरान आतंकवादियों से बहादुरी से लड़ते हुए जवान राजेन्द्र शहादत को प्राप्त हुआ, उसकी शहादत पर पूरे देश को गर्व है। देश के युवाओं में वतन के लिए जज्बा है जो कभी कम नहीं होगा।