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फीस भरने के बाद छात्रा ने एडमिशन किया कैंसिल, तो कोर्ट ने सुनाया ये फैसला!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 05 Jul 2017 02:39 PM IST
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एक छात्रा द्वारा एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लेने के बाद उसे कैंसिल करने के बाद फीस वापस मांगने पर यूनिवर्सिटी ने उसे फीस नहीं लौटाई जिसपर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।
इस मामले में जयपुर महानगर की स्थाई लोक अदालत में अध्यक्ष डी.पी. शर्मा सदस्य ओंकार सिंह एवं रमाशंकर वशिष्ठ ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइसेंस एंड रिसर्च सेन्टर जयपुर-जगतपुरा का सेवा दोष मानते हुए जमा कराई गई फीस 16 लाख 50 हजार रुपए प्रोसेसिंग चार्जेज काटकर शेष राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज देते हुए लौटाने के आदेश दिए हैं।
जयपुर के पंचवटी सर्किल-राजापार्क निवासी प्रिया मक्कड़ पुत्री कैलाश मक्कड़ ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। छात्रा के अधिवक्ता विनोद कुमार जैन ने कोर्ट को बताया कि 26 सितम्बर, 2016 को छात्रा ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के बैंक खाते में ट्यूशन फीस के 15.50 लाख रुपए एवं कॉशन मनी के एक लाख रुपए जमा कराए थे।
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अगले दिन ही प्रिया ने प्रवेश रद्द करने की प्रार्थना की और फीस वापसी के लिए निवेदन किया था। 30 सितम्बर को छात्रा ने निर्धारित प्रोफार्मा में फार्म भरकर भी जमा करा दिया था, लेकिन फीस नहीं लौटाई। बचाव पक्ष की दलील थी कि जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी एक्ट-2008 के अनुसार जमा की गई फीस नॉट रिफंडेबल है।
छात्रा का कहना था कि यूजीसी समस्त विश्वविद्यालयों की रेगुलेटरी संस्था है। यूजीसी के 6 दिसम्बर, 2016 के नोटिफिकेशन के अनुसार फीस शत प्रतिशत रिफंडेबल है और इसे रिफंड करना विश्वविद्यालय का उत्तरदायित्व है।
अदालत ने आदेश में कहा कि प्रकरण में संस्थान की एडमिशन प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। कोई सीट खाली रही, इसका सबूत भी पेश नहीं किया।
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इस मामले में जयपुर महानगर की स्थाई लोक अदालत में अध्यक्ष डी.पी. शर्मा सदस्य ओंकार सिंह एवं रमाशंकर वशिष्ठ ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइसेंस एंड रिसर्च सेन्टर जयपुर-जगतपुरा का सेवा दोष मानते हुए जमा कराई गई फीस 16 लाख 50 हजार रुपए प्रोसेसिंग चार्जेज काटकर शेष राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज देते हुए लौटाने के आदेश दिए हैं।
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जयपुर के पंचवटी सर्किल-राजापार्क निवासी प्रिया मक्कड़ पुत्री कैलाश मक्कड़ ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। छात्रा के अधिवक्ता विनोद कुमार जैन ने कोर्ट को बताया कि 26 सितम्बर, 2016 को छात्रा ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के बैंक खाते में ट्यूशन फीस के 15.50 लाख रुपए एवं कॉशन मनी के एक लाख रुपए जमा कराए थे।
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अगले दिन ही प्रिया ने प्रवेश रद्द करने की प्रार्थना की और फीस वापसी के लिए निवेदन किया था। 30 सितम्बर को छात्रा ने निर्धारित प्रोफार्मा में फार्म भरकर भी जमा करा दिया था, लेकिन फीस नहीं लौटाई। बचाव पक्ष की दलील थी कि जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी एक्ट-2008 के अनुसार जमा की गई फीस नॉट रिफंडेबल है।
छात्रा का कहना था कि यूजीसी समस्त विश्वविद्यालयों की रेगुलेटरी संस्था है। यूजीसी के 6 दिसम्बर, 2016 के नोटिफिकेशन के अनुसार फीस शत प्रतिशत रिफंडेबल है और इसे रिफंड करना विश्वविद्यालय का उत्तरदायित्व है।
अदालत ने आदेश में कहा कि प्रकरण में संस्थान की एडमिशन प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। कोई सीट खाली रही, इसका सबूत भी पेश नहीं किया।