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लाखों का पैकेज छोड़, खेती में दिखाई 'इंजीनियरिंग'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 17 May 2017 05:49 PM IST
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कमल पाटीदार
- फोटो : अमर उजाला
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सॉफ्टवेयर कंपनी में लाखों का पैकेज, चमचमाता वातानुकूलित माहौल को छोड़कर और वहां की तमाम सुविधाओं को छोड़कर कोई खेती करना शुरू कर दे, तो हर कोई आश्चर्य करता है। जी हां, लेकिन यह चौंकाने वाली कहानी है, झालावाड़ जिले की भवानीमंडी तहसील के गुआरी खेड़ा गांव के कमल पाटीदार की। कमल का कहना है कि आज मेरा वार्षिक टर्न ओवर लगभग 2 करोड़ रुपये है। वे बताते हैं कि मैंने खेती से न केवल धन अर्जित किया बल्कि पहचान भी बनाई है।
कमल पाटीदार को बीटेक करने के बाद एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब मिल गया था। इनको यह जॉब अच्छी भी लगी। इस जॉब में पैसा और सुविधा दोनों थे। कमल ने एक दिन सोचा मैं केवल पैसे के लिए नौकरी कर रहा हूं, मेरे माता-पिता गांव में अकेले रहते हैं। क्यों न मैं अपने पिताजी का सहारा बनूं और खेती शुरू कर दूं। कमल गांव आ गए और पिताजी के साथ मिलकर खेती का काम शुरू किया। लेकिन उन्हें तो कुछ नवाचार करना था, इसलिए उन्होंने अन्य किसानों से अलग हटकर कोकपिट पर सब्जियों की पौध तैयार कर बेचने का काम शुरू कर दिया।
अपने इस काम को बढ़ाने के लिए इन्हें एक-एक ग्रीन हाऊस की जरूरत थी, इन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में पॉली हाऊस लगा लिया। इसके बाद दूसरे साल इन्होंने 1 लाख पौध तैयार कर और तीसरे साल 5 लाख पौध तैयार कर बेची। इनके द्वारा तैयार पौध किसानों को अच्छा उत्पादन दे रही थी, इसलिए इनकी मांग बढ़ी और अब ये 20 लाख पौध हर साल बेचते हैं। इसके साथ ही ग्रीन हाऊस में शिमला मिर्च, टमाटर, पत्ता गोभी के साथ कई अन्य फसल ले लेते हैं।
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ग्रीन हाऊस को सतत पानी मिले, इसलिए इन्होंने अपने खेत पर सोलर पम्प सेट भी लगवाया। इसके साथ ही इन्होंने पानी के महत्व को समझते हुए ये बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से खेती कर रहे हैं। कमल ने अपने सपने को पंख देते हुए सजावटी पौधों की नर्सरी शुरू कर दी। ये शादियों में पौधों की सजावट करते हैं और यहां से पौधे बेचते भी हैं।
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कमल पाटीदार को बीटेक करने के बाद एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब मिल गया था। इनको यह जॉब अच्छी भी लगी। इस जॉब में पैसा और सुविधा दोनों थे। कमल ने एक दिन सोचा मैं केवल पैसे के लिए नौकरी कर रहा हूं, मेरे माता-पिता गांव में अकेले रहते हैं। क्यों न मैं अपने पिताजी का सहारा बनूं और खेती शुरू कर दूं। कमल गांव आ गए और पिताजी के साथ मिलकर खेती का काम शुरू किया। लेकिन उन्हें तो कुछ नवाचार करना था, इसलिए उन्होंने अन्य किसानों से अलग हटकर कोकपिट पर सब्जियों की पौध तैयार कर बेचने का काम शुरू कर दिया।
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अपने इस काम को बढ़ाने के लिए इन्हें एक-एक ग्रीन हाऊस की जरूरत थी, इन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 4 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में पॉली हाऊस लगा लिया। इसके बाद दूसरे साल इन्होंने 1 लाख पौध तैयार कर और तीसरे साल 5 लाख पौध तैयार कर बेची। इनके द्वारा तैयार पौध किसानों को अच्छा उत्पादन दे रही थी, इसलिए इनकी मांग बढ़ी और अब ये 20 लाख पौध हर साल बेचते हैं। इसके साथ ही ग्रीन हाऊस में शिमला मिर्च, टमाटर, पत्ता गोभी के साथ कई अन्य फसल ले लेते हैं।
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ग्रीन हाऊस को सतत पानी मिले, इसलिए इन्होंने अपने खेत पर सोलर पम्प सेट भी लगवाया। इसके साथ ही इन्होंने पानी के महत्व को समझते हुए ये बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से खेती कर रहे हैं। कमल ने अपने सपने को पंख देते हुए सजावटी पौधों की नर्सरी शुरू कर दी। ये शादियों में पौधों की सजावट करते हैं और यहां से पौधे बेचते भी हैं।