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न्यायिक कर्मचारियों का आंदोलन शुरू,कोर्ट में कामकाज ठप
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 20 Jul 2017 08:34 PM IST
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हड़ताल पर जाते न्यायिक कर्मचारी
- फोटो : amar ujala
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शेट्टी कमीशन की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर आज से प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश शुरू कर दिया है।
आंदोलन के पहले दिन प्रदेशभर से आए न्यायिक कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट सर्किल पर एकत्रित होकर विद्याधर नगर स्थित सामुदायिक केन्द्र तक रैली निकाली। राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री और जयपुर शाखा के अध्यक्ष बद्रीलाल चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने बुधवार को आयोग की सिफारिशों को लेकर एक अधिसूचना जारी की है, लेकिन अधिसूचना में वेतन बढ़ोत्तरी सहित अन्य कई बिंदु गायब हैं। ऐसे में मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, दूसरी तरफ हाईकोर्ट प्रशासन ने कर्मचारी आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की ओर से प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया कि किसी भी न्यायिक कर्मचारी का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाए।
साथ ही, न्यायिक कार्रवाई आरंभ रखने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों, दूसरे सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ होमगार्ड आदि की सेवाएं ली जाए। रजिस्ट्रार जनरल ने सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से रोजाना तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है।
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वहीं, पीठासीन अधिकारियों ने कई मामलों में आज सुनवाई भी की, लेकिन सहयोग स्टाफ के नहीं होने के चलते कई काम अटक गए।
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आंदोलन के पहले दिन प्रदेशभर से आए न्यायिक कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट सर्किल पर एकत्रित होकर विद्याधर नगर स्थित सामुदायिक केन्द्र तक रैली निकाली। राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री और जयपुर शाखा के अध्यक्ष बद्रीलाल चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने बुधवार को आयोग की सिफारिशों को लेकर एक अधिसूचना जारी की है, लेकिन अधिसूचना में वेतन बढ़ोत्तरी सहित अन्य कई बिंदु गायब हैं। ऐसे में मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, दूसरी तरफ हाईकोर्ट प्रशासन ने कर्मचारी आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की ओर से प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया कि किसी भी न्यायिक कर्मचारी का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाए।
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साथ ही, न्यायिक कार्रवाई आरंभ रखने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों, दूसरे सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ होमगार्ड आदि की सेवाएं ली जाए। रजिस्ट्रार जनरल ने सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से रोजाना तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है।
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वहीं, पीठासीन अधिकारियों ने कई मामलों में आज सुनवाई भी की, लेकिन सहयोग स्टाफ के नहीं होने के चलते कई काम अटक गए।