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भंवरी देवी हत्याकांड: अदालत ने जेल से इंद्रा विश्नोई को वापस बुलाया
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 21 Jun 2017 07:47 PM IST
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इन्द्रा विश्नोई
- फोटो : amar ujala
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चर्चित भंवरी देवी अपहरण और हत्या मामले में आरोपी इंद्रा विश्नोई की न्यायिक अभिरक्षा चार जुलाई तक बढ़ा दी है। हालांकि इस दौरान एक चूक के कारण इंद्रा को एक बार जेल से वापस बुलाना पड़ा।
आरोपी इंद्रा विश्नोई को बुधवार को एसीजेएम सीबीआई केसेज अदालत में पेश किया गया। जहां से इन्द्रा विश्नोई की न्यायिक अभिरक्षा चार जुलाई तक बढ़ा दी गई है। इसके बाद इन्द्रा विश्नोई को कोर्ट ने जेल भेज दिया, लेकिन कुछ देर बाद वापस लाया गया। दरअसल, कोर्ट में उससे भूलवश हस्ताक्षर नहीं करवाए गए। इस पर उसे वापस बुलाकर हस्ताक्षर करवाए गए।
इससे पहले इन्द्रा विश्नोई के अधिवक्ताओं ने न्यायिक अभिरक्षा का विरोध करते हुए कहा कि पर्याप्त आधार नहीं होने के बावजूद सीबीआई न्यायिक अभिरक्षा बढ़वा रही है। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट में सीबीआई की ओर से पेश इन्द्रा विश्नोई के वॉइस सेम्पल की अर्जी पर इन्द्रा के अधिवक्ताओं ने जवाब के लिए समय मांगा। जिस पर 4 जुलाई तक का समय दिया गया है।
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इन्द्रा विश्नोई के अधिवक्ता हेमन्त नाहटा, संजय विश्नोई ने कोर्ट को बताया कि 3 जून को जब सीबीआई ने इन्द्रा को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया तो वारंट की मूल प्रति पर हस्ताक्षर नहीं थे। वहीं, न्यायिक अभिरक्षा में निरूद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था क्योंकि मूल आरोप पत्र में कहीं पर इन्द्रा विश्नोई के खिलाफ सबूत नहीं है। इन्द्रा के अधिवक्ताओं ने इस पर भी सवाल उठाया कि जब इस मामले में सीबीआई अनुसंधान कर रही है तो एटीएस द्वारा गिरफ्तार कैसे किया गया।
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आरोपी इंद्रा विश्नोई को बुधवार को एसीजेएम सीबीआई केसेज अदालत में पेश किया गया। जहां से इन्द्रा विश्नोई की न्यायिक अभिरक्षा चार जुलाई तक बढ़ा दी गई है। इसके बाद इन्द्रा विश्नोई को कोर्ट ने जेल भेज दिया, लेकिन कुछ देर बाद वापस लाया गया। दरअसल, कोर्ट में उससे भूलवश हस्ताक्षर नहीं करवाए गए। इस पर उसे वापस बुलाकर हस्ताक्षर करवाए गए।
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इससे पहले इन्द्रा विश्नोई के अधिवक्ताओं ने न्यायिक अभिरक्षा का विरोध करते हुए कहा कि पर्याप्त आधार नहीं होने के बावजूद सीबीआई न्यायिक अभिरक्षा बढ़वा रही है। जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट में सीबीआई की ओर से पेश इन्द्रा विश्नोई के वॉइस सेम्पल की अर्जी पर इन्द्रा के अधिवक्ताओं ने जवाब के लिए समय मांगा। जिस पर 4 जुलाई तक का समय दिया गया है।
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इन्द्रा विश्नोई के अधिवक्ता हेमन्त नाहटा, संजय विश्नोई ने कोर्ट को बताया कि 3 जून को जब सीबीआई ने इन्द्रा को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया तो वारंट की मूल प्रति पर हस्ताक्षर नहीं थे। वहीं, न्यायिक अभिरक्षा में निरूद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था क्योंकि मूल आरोप पत्र में कहीं पर इन्द्रा विश्नोई के खिलाफ सबूत नहीं है। इन्द्रा के अधिवक्ताओं ने इस पर भी सवाल उठाया कि जब इस मामले में सीबीआई अनुसंधान कर रही है तो एटीएस द्वारा गिरफ्तार कैसे किया गया।