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माटी के लाल को आखिरी विदाई, छुट्टी पर आया था तब कहा था ये

Tue, 26 Sep 2017 07:38 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Tue, 26 Sep 2017 07:38 PM IST
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jodhpur paid homage to the brave son martyred in jammu and kashmir
शहीद गणपतराम की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित करते सेना के अधिकारी - फोटो : amar ujala
जम्मू-कश्मीर के तंगधार में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में शहीद गणपत राम को नम आंखों से विदाई दी। जोधपुर में उनके पैतृक गांव खुड़ियाला में सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। 
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सुबह करीब 10 बजे गणपत की पार्थिव देह दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा पैतृक गांव लाई गई। जैसे ही जवान का शव गांव पहुंचा तो एकबारगी माहौल गमगीन हो गया और परिवार वाले देह से लिपटकर विलाप करने लगे। इसके बाद घर से स्कूल तक शवयात्रा निकाली गई।
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गांव की सरकारी स्कूल के पास राजकीय  और सैन्य सम्मान के साथ शहीद गणपत राम का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान संसदीय सचिव भेराराम सियोल ने सीएम वसुंधरा राजे की ओर से शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रदांजलि दी। इससे पूर्व सेना के अधिकारियों,जनप्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने शहीद को श्रदांजलि दी। इस दौरान शहीद की अंतिम विदाई में उमड़ी भीड़ ने शहीद के जयकारे लगाए। 
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तिरंगे के साथ सेल्फी ली और ये कहा था

jodhpur paid homage to the brave son martyred in jammu and kashmir
शहीद गणपतराम - फोटो : amar ujala
शहीद के पिता और ससुर ने कहा कि उन्हें गणपत की शहादत पर गर्व है और वे अपने दूसरे बेटों को भी सेना में भेजना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की अपील की। 

गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद 8 जून 2014 को गणपत सेना में भर्ती हुए थे।  उनकी दो साल पहले ही शादी हुई थी और 7 सितम्बर को ही वह छुट्टी पूरी कर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। 

दोस्तों का कहना हैं कि उनमें देश के लिए कुछ करने का जज़्बा था और वे अक्सर दोस्तों और गांव के युवकों को भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। एक दोस्त के अनुसार, जब वो अगस्त में छुट्टी पर गांव आए थे और उस समय उन्होंने गांव के स्कूल में स्वाधीनता दिवस समारोह शिरकत की। 

इस दौरान उन्होंने उन सभी दोस्तों के साथ सेल्फी ली थी और कहा था कि 'दोस्तों तिरंगे के साथ एक सेल्फी ले लो। पता नहीं कब मैं इस में लिपट कर आऊं और दोबारा मिलने का मौका नहीं मिले। अगली बार हो सकता है आप लोग मुझे भी यहां श्रद्धांजलि देने के लिए आओ' उनके भाई में भी सेना में शामिल होने का जज्बा है। 
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