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कच्ची पर्ची बंद, बनेगा पक्का बिल, व्यापारी बोले - महंगा पड़ेगा सोना
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 30 Jun 2017 10:01 PM IST
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जैम्स एंड ज्वैलरी में राजस्थान का खासा नाम है। ये कारोबार कच्ची पर्चियों पर चलता है। जीएसटी के बाद पक्की पर्चियों पर चलेगा। व्यापारी कह रहे हैं कि सोना महंगा हो जाएगा।
ज्वैलर जेपी खंडेलवाल का कहना है कि भारत में सोना और ज्वैलरी को सुरक्षित निवेश माना जाता है। जीएसटी से ज्वैलरी महंगी होगी। दरअसल अभी तक ज्यादातर कारोबार कच्ची पर्ची के आधार पर होता है और टैक्स चोरी का कुछ फायदा ग्राहक को भी होता है।
जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों को हिसाब-किताब नियमानुसार रखना होगा। ऐसे में टैक्स अनिवार्य तौर पर देना होगा। ज्वैलर्स के अनुसार, जीएसटी से पुरानी ज्वैलरी पर अभी तीन तरह के टैक्स है। पुरानी ज्वैलरी बेच कर कोई कैश लेता है, तो उसे तीन फीसदी रिवर्स चार्ज देना होता है।
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इसी तरह कोई पुरानी ज्वैलरी को अपग्रेड करवाता तो उसे मैकिंग चार्ज पर 18 फीसदी सर्विस चार्ज देना होगा। इसी तरह कोई व्यक्ति पुरानी ज्वैलरी को बेचकर नई ज्वैलरी खरीदता है तो उसे तीन फीसदी रिवर्स चार्ज और इतना ही उसे जीएसटी टैक्स देना पड़ेगा।
दूसरी तरफ एक पक्ष यह है कि इससे सोना सस्ता होगा। लोग अनावश्यक रूप से सोना खरीदने से बचेंगे, जिससे मांग घटेगी और सोने के दामों में गिरावट आएगी। बिल सिस्टम लागू होने से उपभोक्ताओं को उनके खरीदे माल की गारंटी भी मिलेगी।
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ज्वैलर जेपी खंडेलवाल का कहना है कि भारत में सोना और ज्वैलरी को सुरक्षित निवेश माना जाता है। जीएसटी से ज्वैलरी महंगी होगी। दरअसल अभी तक ज्यादातर कारोबार कच्ची पर्ची के आधार पर होता है और टैक्स चोरी का कुछ फायदा ग्राहक को भी होता है।
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जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों को हिसाब-किताब नियमानुसार रखना होगा। ऐसे में टैक्स अनिवार्य तौर पर देना होगा। ज्वैलर्स के अनुसार, जीएसटी से पुरानी ज्वैलरी पर अभी तीन तरह के टैक्स है। पुरानी ज्वैलरी बेच कर कोई कैश लेता है, तो उसे तीन फीसदी रिवर्स चार्ज देना होता है।
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इसी तरह कोई पुरानी ज्वैलरी को अपग्रेड करवाता तो उसे मैकिंग चार्ज पर 18 फीसदी सर्विस चार्ज देना होगा। इसी तरह कोई व्यक्ति पुरानी ज्वैलरी को बेचकर नई ज्वैलरी खरीदता है तो उसे तीन फीसदी रिवर्स चार्ज और इतना ही उसे जीएसटी टैक्स देना पड़ेगा।
दूसरी तरफ एक पक्ष यह है कि इससे सोना सस्ता होगा। लोग अनावश्यक रूप से सोना खरीदने से बचेंगे, जिससे मांग घटेगी और सोने के दामों में गिरावट आएगी। बिल सिस्टम लागू होने से उपभोक्ताओं को उनके खरीदे माल की गारंटी भी मिलेगी।