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तय सीमा से अधिक निर्माण हटाने के लिए जेडीए स्वतंत्र
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 16 Jun 2017 07:59 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने भांकरोटा के केशवपुरा में ट्रक टर्मिनल के लिए अवाप्त की गई खातेदारी भूमि से अपीलार्थियों को बेदखल पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने कृषि भूमि पर तय सीमा से अधिक बने निर्माणों को हटाने की जेडीए को छूट दी है। अदालत ने अपीलार्थियों को कहा है कि वे संबंधित भूमि का ना तो हस्तानान्तरण करें और ना ही इसका बेचान किया जाए।
न्यायाधीश आलोक शर्मा और न्यायाधीश रामचन्द्रसिंह झाला की अवकाशकालीन विशेष खंडपीठ ने यह आदेश रामजीलाल व चार अन्य अपीलों पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए।
अपील में अधिवक्ता अनिल मेहता ने अदालत को बताया कि जेडीए ने केशवपुरा में ट्रक टर्मिनल के लिए भूमि अवाप्त करने के लिए 2002 में प्रक्रिया आरंभ की। काश्तकार अधिनियम की धारा 6 का नोटिस जारी होने के बाद वर्ष 2007 तक अवार्ड जारी करना था, लेकिन जेडीए ने वर्ष 2013 में अवार्ड जारी किया। इसके अलावा अब ट्रक टर्मिनल बनाने की योजना समाप्त की जा चुकी है।
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अपील में कहा गया कि जेडीए भूमि का कब्जा लेकर उसे नीलाम करना चाहता है। पूर्व में भी इस योजना के लिए की गई अवाप्त भूमि की नीलामी की जा चुकी है। ऐसे में जेडीए को भूमि का कब्जा लेने से रोका जाए। जिसका विरोध करते हुए जेडीए की ओर से कहा गया कि भूमि का अवार्ड पूर्व में जारी हो चुका है। ऐसे में अब भूमि पर जेडीए का स्वामित्व है। अपीलार्थियों ने कृषि भूमि पर तय सीमा से अधिक आवासीय और व्यावसायिक निर्माण कर रखे हैं।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अपीलार्थियों को खातेदारी भूमि से बेदखल करने पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथा-स्थिति के आदेश दिए हैं।
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न्यायाधीश आलोक शर्मा और न्यायाधीश रामचन्द्रसिंह झाला की अवकाशकालीन विशेष खंडपीठ ने यह आदेश रामजीलाल व चार अन्य अपीलों पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए।
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अपील में अधिवक्ता अनिल मेहता ने अदालत को बताया कि जेडीए ने केशवपुरा में ट्रक टर्मिनल के लिए भूमि अवाप्त करने के लिए 2002 में प्रक्रिया आरंभ की। काश्तकार अधिनियम की धारा 6 का नोटिस जारी होने के बाद वर्ष 2007 तक अवार्ड जारी करना था, लेकिन जेडीए ने वर्ष 2013 में अवार्ड जारी किया। इसके अलावा अब ट्रक टर्मिनल बनाने की योजना समाप्त की जा चुकी है।
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अपील में कहा गया कि जेडीए भूमि का कब्जा लेकर उसे नीलाम करना चाहता है। पूर्व में भी इस योजना के लिए की गई अवाप्त भूमि की नीलामी की जा चुकी है। ऐसे में जेडीए को भूमि का कब्जा लेने से रोका जाए। जिसका विरोध करते हुए जेडीए की ओर से कहा गया कि भूमि का अवार्ड पूर्व में जारी हो चुका है। ऐसे में अब भूमि पर जेडीए का स्वामित्व है। अपीलार्थियों ने कृषि भूमि पर तय सीमा से अधिक आवासीय और व्यावसायिक निर्माण कर रखे हैं।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अपीलार्थियों को खातेदारी भूमि से बेदखल करने पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथा-स्थिति के आदेश दिए हैं।