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जाट आरक्षण: ओबीसी आयोग ने सीएम राजे को सौंपी रिपोर्ट

Thu, 22 Jun 2017 05:32 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 22 Jun 2017 05:32 PM IST
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Jat reservation case: OBC Commission reports submitted to Chief Minister
वसुंधरा राजे
राजस्थान में धौलपुर-भरतपुर के जाटों के आरक्षण मामले में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को रिपोर्ट सौंप दी। आयोग के चेयरमैन जितेन्द्र गोयल ने यह रिपोर्ट सीएम राजे को सौंपी।
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जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से भरतपुर-धौलपुर के जाट समुदाय के लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि राजस्थान के जाटों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। ऐसे में उन्हें आरक्षण दिया जाए।
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रिपोर्ट सौंपने के बाद डॉ. सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राजस्थान के जाटों को आरक्षण के बिना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि आरक्षण मिलने से जाट समुदाय को लाभ होगा और उनके बच्चे भी विकास की राह में आगे बढ़ सकेंगे।
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उनका कहना था कि सरकार खुद जाटों को आरक्षण देने की मंशा रखती है क्योंकि धौलपुर-भरतपुर के जाटों की स्थिति भी राज्य के अन्य जिलों के जाटों से बेहतर नहीं है। अब सरकार खुद इस कोशिश में है कि जाट आरक्षण मामले में जो कमियां रह गई थी उन्हें दूर किया जाए।

सरकार ने आंदोलन शुरू होने से ठीक एक दिन पहले दिया ये मैसेज

Jat reservation case: OBC Commission reports submitted to Chief Minister
reservation
गौरतलब है कि आरक्षण को लेकर जाट समुदाय ने पिछले दिनों आंदोलन भी किया था और राज्य सरकार को 23 जून को फिर से आंदोलन शुरू करने की बात कही थी। इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को ओबीसी आयोग के चेयरमैन जितेन्द्र गोयल ने बीसूका उपाध्यक्ष डॉ. दिगंबर सिंह की उपस्थिति में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सौंप दी।

उधर, जाटों के आंदोलन से एक दिन पहले रिपोर्ट सौंपने के बाद माना जा रहा है कि जाटों को राज्य सरकार की ओर से परोक्ष रूप से एक मैसेज दे दिया गया है। जिसके बाद जाटों का आंदोलन को लेकर गुस्सा निरर्थक है। अब सरकार इस रिपोर्ट को केबिनेट के समक्ष पेश करेगी, ताकि जाट आरक्षण मामले में आगे कदम बढ़ाया जा सके।

सूत्रों का ये भी कहना है कि जाट आरक्षण को लेकर वसुंधरा सरकार की ओर से जो पहल की गई है उसके नतीजे आगे आने वाले समय में सकारात्मक रहेंगे। ऐसे में जाटों को अपना आंदोलन वापस लेना चाहिए।

दूसरी ओर, 23 जून को जाटों के आंदोलन शुरू करने को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स​तर्कता बरतनी शुरू कर दी है। भरतपुर के कई इलाकों में पुलिस जाट नेताओं पर बराबर नजर बनाए हुए है और उन्हें समझाने की कोशिश भी नेताओं द्वारा की जा रही है।
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