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आरक्षण की मांग को लेकर जाटों का महापड़ाव 23 तक स्थगित
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 09 Jun 2017 06:28 PM IST
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भरतपुर के पास जाट महापड़ाव।
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ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर भरतपुर—धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से जारी महापड़ाव 23 जून तक स्थगित कर दिया गया है। जाटों ने पिछले दो दिन से भरतपुर के पास रारह में पड़ाव डाल रखा था।
जानकारी के अनुसार, काफी समय से भरतपुर—धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले जाट समुदाय ओबीसी में आरक्षण की मांग कर रहा है। अपनी इसी मांग को लेकर पिछले दो दिन से जाटों ने भरतपुर के रारह में महापड़ाव डाल रखा था। इसके लिए बाकायदा महापड़ाव में संख्या बढ़ाने के लिए टीमों का गठन भी किया गया था। ये टीमें घर—घर जाकर जाट समुदाय के लोगों से महापड़ाव में शामिल होने के लिए संपर्क भी साधने वाली थी। इससे पहले ही शुक्रवार शाम जाट समुदाय ने अपने महापड़ाव को आगमी 23 जून तक स्थगित कर दिया है। हालांकि, अभी इस सम्बंध में कोई भी स्पष्ट बोलने को तैयार नहीं है कि आखिरकार किस कारण से ये महापड़ाव स्थगित किया गया।
गौरतलब है कि इससे पूर्व जिला प्रशासन की ओर से दस सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल को भरतपुर वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन जाट समुदाय के नेताओं ने भरतपुर में वार्ता करने से इनकार कर दिया था। संघर्ष समिति का आरोप है कि ओबीसी आयोग की सर्वे रिपोर्ट तैयार हुए तीन माह हो चुका है। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस मामले में देरी हो रही है। यह सर्वे राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से कराया गया था।
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जानकारी के अनुसार, काफी समय से भरतपुर—धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले जाट समुदाय ओबीसी में आरक्षण की मांग कर रहा है। अपनी इसी मांग को लेकर पिछले दो दिन से जाटों ने भरतपुर के रारह में महापड़ाव डाल रखा था। इसके लिए बाकायदा महापड़ाव में संख्या बढ़ाने के लिए टीमों का गठन भी किया गया था। ये टीमें घर—घर जाकर जाट समुदाय के लोगों से महापड़ाव में शामिल होने के लिए संपर्क भी साधने वाली थी। इससे पहले ही शुक्रवार शाम जाट समुदाय ने अपने महापड़ाव को आगमी 23 जून तक स्थगित कर दिया है। हालांकि, अभी इस सम्बंध में कोई भी स्पष्ट बोलने को तैयार नहीं है कि आखिरकार किस कारण से ये महापड़ाव स्थगित किया गया।
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गौरतलब है कि इससे पूर्व जिला प्रशासन की ओर से दस सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल को भरतपुर वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन जाट समुदाय के नेताओं ने भरतपुर में वार्ता करने से इनकार कर दिया था। संघर्ष समिति का आरोप है कि ओबीसी आयोग की सर्वे रिपोर्ट तैयार हुए तीन माह हो चुका है। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस मामले में देरी हो रही है। यह सर्वे राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से कराया गया था।
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