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जयपुर में होगा आरएसएस का स्वर गोविंदम, दो हजार घोषवादक करेंगे प्रदर्शन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 27 Sep 2017 08:06 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों का विशाल घोष शिविर 2 से 5 नवम्बर तक केशव विद्यापीठ जामडोली में आयोजित होगा।
इस घोष शिविर में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत मौजूद रहेंगे। इस शिविर में जयपुर प्रान्त के करीब दो हजार घोष वादक हिस्सा लेंगे। जयपुर प्रान्त संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए जयपुर के आराध्य गोविंददेवजी को निमंत्रण दिया गया।
इस अवसर पर स्वयंसेवक घोष वादन के साथ जलेब चौक से गोविन्द देव जी मन्दिर पहुंचे। जयपुर प्रान्त बनने के बाद यह घोष का पहला विशाल शिविर होगा। गोविन्द देव की नगरी में सम्पन्न होने वाले इस शिविर को स्वर गोविन्दम्-2017’ का नाम दिया गया है। इस शिविर में घोष वादकों का पथ संचलन भी होगा। शिविर में प्रत्येक शाखा से 12 वर्ष से अधिक आयु के दो वंशी वादकों को भी बुलाया गया है।
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इस घोष शिविर में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत मौजूद रहेंगे। इस शिविर में जयपुर प्रान्त के करीब दो हजार घोष वादक हिस्सा लेंगे। जयपुर प्रान्त संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए जयपुर के आराध्य गोविंददेवजी को निमंत्रण दिया गया।
इस अवसर पर स्वयंसेवक घोष वादन के साथ जलेब चौक से गोविन्द देव जी मन्दिर पहुंचे। जयपुर प्रान्त बनने के बाद यह घोष का पहला विशाल शिविर होगा। गोविन्द देव की नगरी में सम्पन्न होने वाले इस शिविर को स्वर गोविन्दम्-2017’ का नाम दिया गया है। इस शिविर में घोष वादकों का पथ संचलन भी होगा। शिविर में प्रत्येक शाखा से 12 वर्ष से अधिक आयु के दो वंशी वादकों को भी बुलाया गया है।
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भारतीय धुनों पर आधारित रचनाओं पर होगा घोषवादन
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- फोटो : Amar Ujala
घोष (बैण्ड) संघ में शारिरीक विभाग का अभिन्न अंग है। संघ के घोष में आनक (ड्रम), पणव (वास ड्रम), शंख (विगुल), वंशी, झांझ, त्रिभुज मुख्य पारम्परिक वाद्य्यों के रूप में सम्मिलित है। साथ में नूतन वाद्य तूर्य, स्वरद, नागांग, गौमुख भी शामिल है। स्वयंसेवकों द्वारा इन सभी वाद्यों से भारतीय धुनों पर आधारित और स्वयंसेवकों द्वारा ही निर्मित भारतीय रचनाओं का वादन किया जाता है। इन रचनाओं के अलग-अलग नाम भी होते हैं जैसे किरण, श्रीराम, उदय, सोनभद्र, चेतक, मीरा, शिवरंजनी, तिलंग व हल्दीघाटी आदि।
इस शिविर के लिए एक गीत की रचना भी हुई है जिसमें संघ के वर्तमान कार्य का स्वरूप, स्वयंसेवक के गुण एवं घोष का महत्व दर्शाया गया है। राजस्थानी बोली की मिठास से सजे इस गीत के बोल “कदम-कदम री साधना, आ देश री आराधना...स्वर गोविंदम् नाद रे’’ है।
इस शिविर के लिए एक गीत की रचना भी हुई है जिसमें संघ के वर्तमान कार्य का स्वरूप, स्वयंसेवक के गुण एवं घोष का महत्व दर्शाया गया है। राजस्थानी बोली की मिठास से सजे इस गीत के बोल “कदम-कदम री साधना, आ देश री आराधना...स्वर गोविंदम् नाद रे’’ है।