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जयपुर मेट्रो के दो साल: आमदनी चवन्नी खर्च रुपैया
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 02 Jun 2017 05:35 PM IST
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जयपुर मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर मेट्रो रेल के संचालन को दो साल पूरे हो गए हैं। इन दो साल में मेट्रो रेल प्रशासन जयपुर मेट्रो रेल की लोकप्रियता को मुनाफे में बदलने में सफल नहीं रहा। जयपुर में मेट्रो रेल का उद्घाटन तीन जून, 2015 को हुआ था।
उद्घाटन के समय इसका क्रेज था। उस महीने यानि जून 2015 में 49774 हजार यात्रियों ने जयपुर मेट्रो रेल में सफर किया। उसके अगले महीने जुलाई 2015 में से आंकड़ा गिरकर 32 हजार के आसपास पहुंच गया। पिछले साल जून में यह आंकड़ा इससे भी नीचे आ गया और केवल 22 हजार रह गया। अब करीब 20 हजार मासिक यात्रीभार जयपुर मेट्रो को मिल रहा है। जयपुर मेट्रो संचालन पर रोजाना का खर्च करीब 11 लाख रुपए आता है, जबकि कमाई देखी जाए तो तीन लाख रुपए भी नहीं है। यानि आमदनी चवन्नी और खर्च रुपैया। हालात यह है कि इस घाटे को कम करने के तमाम प्रयास भी बेअसर साबित हो रहे है।
जयपुर मेट्रो देश में पहली ऐसी मेट्रो थी, जिसने समय के आधार पर यात्री किराया तय किया। पीक आवर्स में यात्री किराया तय किया गया जो सामान्य समय के किराए से थोड़ा अधिक था। मेट्रो अपनी समय पालना को लेकर अनुशासित रही है। न ही एक भी दिन यह बंद रही, वहीं समय पालना में भी 99.9 फीसदी से ज्यादा अनुशासित भी रही है।
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उद्घाटन के समय इसका क्रेज था। उस महीने यानि जून 2015 में 49774 हजार यात्रियों ने जयपुर मेट्रो रेल में सफर किया। उसके अगले महीने जुलाई 2015 में से आंकड़ा गिरकर 32 हजार के आसपास पहुंच गया। पिछले साल जून में यह आंकड़ा इससे भी नीचे आ गया और केवल 22 हजार रह गया। अब करीब 20 हजार मासिक यात्रीभार जयपुर मेट्रो को मिल रहा है। जयपुर मेट्रो संचालन पर रोजाना का खर्च करीब 11 लाख रुपए आता है, जबकि कमाई देखी जाए तो तीन लाख रुपए भी नहीं है। यानि आमदनी चवन्नी और खर्च रुपैया। हालात यह है कि इस घाटे को कम करने के तमाम प्रयास भी बेअसर साबित हो रहे है।
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जयपुर मेट्रो देश में पहली ऐसी मेट्रो थी, जिसने समय के आधार पर यात्री किराया तय किया। पीक आवर्स में यात्री किराया तय किया गया जो सामान्य समय के किराए से थोड़ा अधिक था। मेट्रो अपनी समय पालना को लेकर अनुशासित रही है। न ही एक भी दिन यह बंद रही, वहीं समय पालना में भी 99.9 फीसदी से ज्यादा अनुशासित भी रही है।
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