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18 साल पहले बंद फैक्ट्री के कर्मचारी को 19 साल का वेतन देने का आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 21 Apr 2017 07:58 PM IST
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कोर्ट
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर मैटल्स के 19 साल पहले हटाए गए कर्मचारी को पुन: सेवा में लेने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को सेवा में मानते हुए पिछला वेतन और समस्त परिलाभ तीन माह में अदा करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश प्रेमचंद गुप्ता की ओर से 1999 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को बडे हल्के अंदाज में सेवा से निकालने का आदेश जारी किया गया है। यह न केवल गंभीर मामला है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि उसे जयपुर मैटल्स एंड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने याचिकाकर्ता को 10 नवंबर 1998 को बिना नोटिस और बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए मनमाने तरीके से सेवा से हटा दिया। ऐसे में उसे पुन: सेवा में रखने के आदेश देते हुए पिछला बकाया दिलाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को सेवा में रखते हुए पिछला वेतन सहित सभी परिलाभ अदा करने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान जयपुर मेटल्स की ओर से पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने पूर्व में पैरवी करने वाले अधिवक्ता मनोज कुमार शर्मा को बुलाया। उन्होंने अदालत को बताया कि वे मामले की फाइल लौटा चुके हैं। इस पर अदालत ने समान प्रकरण में जयपुर मैटल्स की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता रवि भोजक को बुलाया। उन्होंने भी अदालत को बताया कि वे अब जयपुर मैटल्स के लिए पैरवी नहीं कर रहे हैं। इस पर अदालत ने एक पक्षीय सुनवाई करते हुए आदेश जारी किए हैं।
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न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश प्रेमचंद गुप्ता की ओर से 1999 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को बडे हल्के अंदाज में सेवा से निकालने का आदेश जारी किया गया है। यह न केवल गंभीर मामला है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि उसे जयपुर मैटल्स एंड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने याचिकाकर्ता को 10 नवंबर 1998 को बिना नोटिस और बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए मनमाने तरीके से सेवा से हटा दिया। ऐसे में उसे पुन: सेवा में रखने के आदेश देते हुए पिछला बकाया दिलाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को सेवा में रखते हुए पिछला वेतन सहित सभी परिलाभ अदा करने के आदेश दिए हैं।
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सुनवाई के दौरान जयपुर मेटल्स की ओर से पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने पूर्व में पैरवी करने वाले अधिवक्ता मनोज कुमार शर्मा को बुलाया। उन्होंने अदालत को बताया कि वे मामले की फाइल लौटा चुके हैं। इस पर अदालत ने समान प्रकरण में जयपुर मैटल्स की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता रवि भोजक को बुलाया। उन्होंने भी अदालत को बताया कि वे अब जयपुर मैटल्स के लिए पैरवी नहीं कर रहे हैं। इस पर अदालत ने एक पक्षीय सुनवाई करते हुए आदेश जारी किए हैं।
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आज भी जारी है यहां धरना
धरना
गौरतलब है कि यह फैक्ट्री करीब 18 साल पहले बंद हो चुकी है। राजस्थान सरकार ने बिजली के मीटर बनाने वाली जयपुर मैटल्स फैक्ट्री को वर्ष 2000 में बंद कर दिया था। इसके पीछे सरकार ने फैक्ट्री के कुप्रबंधन और घाटा होने को बंद करने का कारण बताया था। इसके बाद यहां काम करने वाले करीब डेढ़ हजार कर्मचारियों को भी निकाल दिया गया था। अचानक नौकरी जाने के बाद ये कर्मचारी निरन्तर अपने हक के लिए यहां धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। जानकारी के अनुसार सैकड़ों कर्मचारी तो मुफलिसी के चलते दुनिया भी छोड़ चुके हैं।
स्थिति यह है कि आज भी जिन कर्मचारियों की मौत हो चुकी है उनकी विधवा ही यहां धरने को समर्थन करने आती हैं। ताकि उनके पति को न्याय तो मिल सके। पिछले 17 सालों से इन कर्मचारियों के परिवार और बच्चे अचानक नौकरी जाने के बाद संघर्ष कर रहे हैं।
मैटल्स एण्ड इलेक्ट्रिकल्स मजदूर संघ के अध्यक्ष कन्हैया लाल शर्मा के अनुसार यह बंद कारखाना चलाने के लिए सरकार ने 2007 में एक निजी कंपनी से समझौता भी किया था, लेकिन इस समझौते को आज तक लागू नहीं किया गया।
स्थिति यह है कि आज भी जिन कर्मचारियों की मौत हो चुकी है उनकी विधवा ही यहां धरने को समर्थन करने आती हैं। ताकि उनके पति को न्याय तो मिल सके। पिछले 17 सालों से इन कर्मचारियों के परिवार और बच्चे अचानक नौकरी जाने के बाद संघर्ष कर रहे हैं।
मैटल्स एण्ड इलेक्ट्रिकल्स मजदूर संघ के अध्यक्ष कन्हैया लाल शर्मा के अनुसार यह बंद कारखाना चलाने के लिए सरकार ने 2007 में एक निजी कंपनी से समझौता भी किया था, लेकिन इस समझौते को आज तक लागू नहीं किया गया।