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अब आसान नहीं होगा सरकारी कर्मचारियों पर केस करना
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 08 Sep 2017 03:20 PM IST
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लोकसेवकों के खिलाफ केस करने से पहले अब राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। अदालतें भी ऐसे परिवादो को जांच के लिए तब तक नहीं भेज सकेगी, जब तक सक्षम अधिकारी द्वारा अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की गई हो।
इसके लिए राज्य सरकार ने सीआरपीसी की धारा 197 में संशोधन किया है। संशोधन के अनुसार अब किसी भी लोक सेवक, जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ केस करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अभियोजन स्वीकृति ली जाएगी। सक्षम अधिकारी के 6 माह में स्वीकृति जारी नहीं करने पर स्वीकृति स्वतः जारी होना माना जाएगा। हालांकि, यह प्रावधान उस स्थिति में ही लागू रहेगा जब किसी लोकसेवक ने अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कोई कार्य किया हो।
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इसके लिए राज्य सरकार ने सीआरपीसी की धारा 197 में संशोधन किया है। संशोधन के अनुसार अब किसी भी लोक सेवक, जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ केस करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अभियोजन स्वीकृति ली जाएगी। सक्षम अधिकारी के 6 माह में स्वीकृति जारी नहीं करने पर स्वीकृति स्वतः जारी होना माना जाएगा। हालांकि, यह प्रावधान उस स्थिति में ही लागू रहेगा जब किसी लोकसेवक ने अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कोई कार्य किया हो।
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ये भी कहा अध्यादेश में...
court
राज्य सरकार की ओर से जारी अध्यादेश में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे किसी लोकसेवक, जिसके विरुद्ध इस धारा के तहत कार्यवाही लंबित है उसका नाम या किसी भी तरह की पहचान को प्रकट करेगा तो पहचान प्रकट करने वाले व्यक्ति को 2 साल तक की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अब तक केवल अदालत में मुकदमा आरंभ करने से पूर्व संबंधित लोक सेवक के खिलाफ राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति लेनी पड़ती थी। पुलिस जांच या FIR दर्ज कराने के लिए अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती थी।
गौरतलब है कि इससे पहले सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अब तक केवल अदालत में मुकदमा आरंभ करने से पूर्व संबंधित लोक सेवक के खिलाफ राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति लेनी पड़ती थी। पुलिस जांच या FIR दर्ज कराने के लिए अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती थी।