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'मत कर यकीन हाथ की लकीरों पर...' ये देवेन्द्र ने कर दिखाया
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 03 Aug 2017 07:22 PM IST
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किसी शायर ने क्या खूब कहा है 'मत कर यकीन अपने हाथ की लकीरों पर, नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।' ये साबित कर दिखाया है राजस्थान के इस खिलाड़ी ने, जिसे आज राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड के चुना गया है।
हम बात कर रहे हैं राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले देवेन्द्र झाझड़िया की। देवेन्द्र ने आज एक बार फिर अपने राज्य और जिले का नाम रोशन किया है। बचपन में ही अपना एक हाथ खो देने के बाद भी देवेन्द्र ने हिम्मत नहीं हारी और यह साबित करके दिखा दिया कि नसीब लकीरों से नहीं बनता, बल्कि मेहनत और लगन से बनाया जाता है।
देश को साल 2016 में आयोजित हुए रियो पैरालंपिक खेलों में जैवलिन थ्रो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जिताने वाले देवेन्द्र झाझड़िया के राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद राजस्थान के लोगों में फिर से खुशी की लहर है।
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खेलों में देश के सर्वोच्च सम्मान पाने वाले देवेन्द्र का जन्म राजस्थान में चूरू जिले के राजगढ़ तहसील में हुआ था।
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हम बात कर रहे हैं राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले देवेन्द्र झाझड़िया की। देवेन्द्र ने आज एक बार फिर अपने राज्य और जिले का नाम रोशन किया है। बचपन में ही अपना एक हाथ खो देने के बाद भी देवेन्द्र ने हिम्मत नहीं हारी और यह साबित करके दिखा दिया कि नसीब लकीरों से नहीं बनता, बल्कि मेहनत और लगन से बनाया जाता है।
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देश को साल 2016 में आयोजित हुए रियो पैरालंपिक खेलों में जैवलिन थ्रो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जिताने वाले देवेन्द्र झाझड़िया के राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद राजस्थान के लोगों में फिर से खुशी की लहर है।
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खेलों में देश के सर्वोच्च सम्मान पाने वाले देवेन्द्र का जन्म राजस्थान में चूरू जिले के राजगढ़ तहसील में हुआ था।
हादसे ने छीना एक हाथ तो दूसरे हाथ से रचा इतिहास
फाइल फोटो
देवेन्द्र ने देश का नाम एक बार ही नहीं बल्कि कई बार रोशन किया। अपने एक हाथ से देवेन्द्र ने कई उपलब्धियां हासिल की। जिसके बाद आखिरकार सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुना।
देवेन्द्र भारत को पैरालंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जिताने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी हैं। इतना ही नहीं इससे पहले उन्होंने साल 2004 में ग्रीस के एथेंस में हुए समर पैरालंपिक खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था।
देश को पैरालंपिक खेलों में एकमात्र गोल्ड दिलाने वाले जैवलिन थ्रोअर देवेन्द्र झाझड़िया ने बचपन में हुए हादसे में अपना एक हाथ गंवा दिया था।
देवेन्द्र अपने गांव में दोस्तों के साथ पेड़ पर चढ़कर फल तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनका एक हाथ बिजली के तार को छू गया था। जिसके बाद उनका पूरा हाथ बुरी तरह से झुलस गया, जिसे बाद में काटना ही पड़ा।
देवेन्द्र भारत को पैरालंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जिताने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी हैं। इतना ही नहीं इससे पहले उन्होंने साल 2004 में ग्रीस के एथेंस में हुए समर पैरालंपिक खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था।
देश को पैरालंपिक खेलों में एकमात्र गोल्ड दिलाने वाले जैवलिन थ्रोअर देवेन्द्र झाझड़िया ने बचपन में हुए हादसे में अपना एक हाथ गंवा दिया था।
देवेन्द्र अपने गांव में दोस्तों के साथ पेड़ पर चढ़कर फल तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनका एक हाथ बिजली के तार को छू गया था। जिसके बाद उनका पूरा हाथ बुरी तरह से झुलस गया, जिसे बाद में काटना ही पड़ा।