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खेती में ना हो परेशानी, इसलिए बना दी ये मशीन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 27 Sep 2017 06:38 PM IST
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रामधन
- फोटो : amar ujala
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कहते है कि जहां परेशानी होती है वहां उसका कोई ना कोई हल भी निकल आता है। किशनगढ़ के पास डीडवाड़ा गांव के किसान रामधन यादव ने निराई-गुड़ाई में रोजाना आने वाली परेशानी से निजात पाने के लिए खुद ही एक मशीन तैयार कर दी। यादव अब आसपास के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं।
अजमेर जिला कलक्टर गौरव गोयल ने बताया कि किशनगढ़ के पास डीडवाड़ा के रहने वाले रामधन यादव के पास करीब 2 हैक्टेयर जमीन है। खेती के लिए कृषक को श्रमिकों और महंगी निराई-गुड़ाई मशीन पर निर्भर रहना पड़ता था। रोजाना आने वाली परेशानियों और धन की बचत के लिए रामधन यादव ने खुद ही एक मशीन बनाने की ठान ली। मात्र 42 हजार रुपए की लागत से यादव ने निराई-गुड़ाई की मशीन बनाई। इस मशीन में लाइन से लाइन की दूरी इस तरह से व्यवस्थित की गई है कि वर्तमान समय में प्रचलित सीड ड्रिल व कल्टीवेटर से बोई फसलों में आसानी से निराई-गुड़ाई हो सके।
कृषि विभाग के उप निदेशक वी.के.शर्मा ने बताया कि यादव का यह आविष्कार आसपास के किसानों के भी काम आ रहा है। उन्हें इसके लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा एक लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया गया।
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अजमेर जिला कलक्टर गौरव गोयल ने बताया कि किशनगढ़ के पास डीडवाड़ा के रहने वाले रामधन यादव के पास करीब 2 हैक्टेयर जमीन है। खेती के लिए कृषक को श्रमिकों और महंगी निराई-गुड़ाई मशीन पर निर्भर रहना पड़ता था। रोजाना आने वाली परेशानियों और धन की बचत के लिए रामधन यादव ने खुद ही एक मशीन बनाने की ठान ली। मात्र 42 हजार रुपए की लागत से यादव ने निराई-गुड़ाई की मशीन बनाई। इस मशीन में लाइन से लाइन की दूरी इस तरह से व्यवस्थित की गई है कि वर्तमान समय में प्रचलित सीड ड्रिल व कल्टीवेटर से बोई फसलों में आसानी से निराई-गुड़ाई हो सके।
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कृषि विभाग के उप निदेशक वी.के.शर्मा ने बताया कि यादव का यह आविष्कार आसपास के किसानों के भी काम आ रहा है। उन्हें इसके लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा एक लाख रुपए का पुरस्कार भी दिया गया।
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