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तीन तलाक के समर्थन में जुटीं हजारों मुस्लिम महिलाएं
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 10 Apr 2017 12:02 PM IST
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जयपुर में सेमिनार
- फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिला विंग की चीफ आॅर्गेनाइजर डॉ. अस्मां जहरा ने कहा कि तलाक पर उंगली उठाना गलत है। बोर्ड की ओर से जयपुर स्थित ईदगाह में तफहीम-ए-शरिया में आयोजित सेमीनार में हजारों महिलाओं के बीच तलाक को कुरआन और शरीयत के अनुसार बताते हुए, तीन तलाक के समर्थन में आवाज उठाई गई।
डॉ अस्मां जहरा के अनुसार तीन तलाक को लेकर जो विवाद पैदा किया जा रहा है, वह गलत है। यह कोई मसला है ही नहीं। तलाक केवल शौहर-बीवी के विवादों का हल है। डॉ. जहरा का कहना है कि शरीयत में किसी भी प्रकार का दखल मंजूर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुस्लमानों के लिए मुख्य परेशानी गरीबी, बेरोजगारी व शिक्षा हासिल नहीं होना है। बोर्ड की मीटिंग में राज्य का पहला शरिया कोर्ट जयपुर में बनाने का निर्णय भी किया गया।
इधर, बोर्ड की सदस्य यास्मीन फारुखी ने दावा किया ट्रिपल तलाक के हक में महिला विंग को साढ़े तीन करोड़ फॉर्म मिले हैं। हालांकि सेमीनार में तलाक का उपयोग कम से कम करने पर जोर दिया गया।
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मेहर की रकम बढ़ाने पर जोर
सेमीनार में मुस्लिम महिलाओं को विभिन्न प्रकार की जानकारी दी गई। इस मौके पर निकाह, तलाक पर महिलाओं को जागरूक किया गया। साथ ही, मेहर की रकम बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वहीं सेमीनार में यह भी दावा किया गया कि देशभर में सबसे कम तलाक के मामले मुस्लिमों में हैं।
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डॉ अस्मां जहरा के अनुसार तीन तलाक को लेकर जो विवाद पैदा किया जा रहा है, वह गलत है। यह कोई मसला है ही नहीं। तलाक केवल शौहर-बीवी के विवादों का हल है। डॉ. जहरा का कहना है कि शरीयत में किसी भी प्रकार का दखल मंजूर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुस्लमानों के लिए मुख्य परेशानी गरीबी, बेरोजगारी व शिक्षा हासिल नहीं होना है। बोर्ड की मीटिंग में राज्य का पहला शरिया कोर्ट जयपुर में बनाने का निर्णय भी किया गया।
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इधर, बोर्ड की सदस्य यास्मीन फारुखी ने दावा किया ट्रिपल तलाक के हक में महिला विंग को साढ़े तीन करोड़ फॉर्म मिले हैं। हालांकि सेमीनार में तलाक का उपयोग कम से कम करने पर जोर दिया गया।
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मेहर की रकम बढ़ाने पर जोर
सेमीनार में मुस्लिम महिलाओं को विभिन्न प्रकार की जानकारी दी गई। इस मौके पर निकाह, तलाक पर महिलाओं को जागरूक किया गया। साथ ही, मेहर की रकम बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वहीं सेमीनार में यह भी दावा किया गया कि देशभर में सबसे कम तलाक के मामले मुस्लिमों में हैं।