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अजमेर ब्लास्ट के दोषियों की सजा का फैसला टला

Thu, 16 Mar 2017 12:32 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 16 Mar 2017 12:32 PM IST
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in case of ajmer bomb blase three accused found guilty, assemanand gets relief
असीमानन्द - फोटो : demo pic
अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामले में एनआईए मामलों की विशेष अदालत में गुरुवार को दोषियों की सजा का फैसला टल गया। अब फैसला सुनाने की तारीख 18 मार्च तय की गई है। इस मामले में विशेष न्यायाधीश दिनेश गुप्ता ने आरोपी देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया था। इनमें सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। जबकि स्वामी असीमानन्द व अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अब 18 मार्च को दोषी देवेंद्र व भावेश को सजा सुनाई जाएगी।
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पिछली सुनवाई में देवेंद्र और भावेश दोनों पर 1—1 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया जा चुका है। गौरतलब है कि एनआईए ने तेरह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से आठ आरोपी साल 2010 से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। न्यायिक हिरासत में बंद आठ आरोपी स्वामी असीमानंद,हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार,भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता हैं। एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे जमानत पर है।
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अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता— ए— नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को बम विस्फोट हुआ था। 11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट में तीन जायरीन मारे गए थे और पंद्रह जायरीन घायल हो गए थे। विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग मिला था। जिसमे टाइमर डिवाइस लगा जिंदा बम रखा था।
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मामले में एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है और तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर फरार चल रहा है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए लेकिन अदालत में गवाही के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए।


राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी। बाद में एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।
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