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ट्रैप होने पर तत्काल होंगे सस्पेंड, शुरू होगी विभागीय जांच
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 02 Sep 2017 09:12 PM IST
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भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कोई अफसर या कर्मचारी ट्रेप होगा तो उसके खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू करने के साथ निलंबित कर दिया जाएगा।
यह जानकारी आज राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से सर्कुलर पेश कर जानकारी दी गई है। सर्कुलर को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने अर्जुनलाल व अन्य की ओर से दायर जमानत अर्जियों को निस्तारित कर दिया।
राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुदेश सैनी ने बताया कि कार्मिक विभाग ने इस सर्कुलर के अनुसार अब आरोपी की जमानत होने के छह माह में ही विभागीय कार्रवाई को पूरा कर लिया जाएगा। कार्मिक विभाग ने इस सर्कुलर को राज्य के सभी विभागों को भेजा गया है।
गौरतलब है कि गत सुनवाई को अदालत के सामाने आया था कि ट्रेप किए गए अफसरों-कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो पाती और जांच लंबित रहती है। इस पर अदालत ने कार्मिक सचिव को पेश होने के आदेश दिए थे। उनकी जगह पेश हुए आईएएस संजय मल्होत्रा ने अदालत को आश्वस्त किया था कि वे अदालत की मंशा को देखतेहुए सर्कुलर जारी करवा देंगे। उन्होंने अदालत को यह भी बताया था कि कार्मिक विभाग ने अगस्त 2001 में सर्कुलर जारी कर सभी विभागों को कार्रवाई के लिए स्वतंत्रता दी थी, लेकिन जब तक ट्रायल प्रभावित होने की आशंका के चलते ट्रायल लंबित रहने के दौरान कार्रवाई नहीं करते।
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यह जानकारी आज राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से सर्कुलर पेश कर जानकारी दी गई है। सर्कुलर को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने अर्जुनलाल व अन्य की ओर से दायर जमानत अर्जियों को निस्तारित कर दिया।
राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुदेश सैनी ने बताया कि कार्मिक विभाग ने इस सर्कुलर के अनुसार अब आरोपी की जमानत होने के छह माह में ही विभागीय कार्रवाई को पूरा कर लिया जाएगा। कार्मिक विभाग ने इस सर्कुलर को राज्य के सभी विभागों को भेजा गया है।
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गौरतलब है कि गत सुनवाई को अदालत के सामाने आया था कि ट्रेप किए गए अफसरों-कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो पाती और जांच लंबित रहती है। इस पर अदालत ने कार्मिक सचिव को पेश होने के आदेश दिए थे। उनकी जगह पेश हुए आईएएस संजय मल्होत्रा ने अदालत को आश्वस्त किया था कि वे अदालत की मंशा को देखतेहुए सर्कुलर जारी करवा देंगे। उन्होंने अदालत को यह भी बताया था कि कार्मिक विभाग ने अगस्त 2001 में सर्कुलर जारी कर सभी विभागों को कार्रवाई के लिए स्वतंत्रता दी थी, लेकिन जब तक ट्रायल प्रभावित होने की आशंका के चलते ट्रायल लंबित रहने के दौरान कार्रवाई नहीं करते।
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