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पोकरण में डेढ़ माह तक होगा हॉवित्जर तोपों का परीक्षण
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 19 May 2017 11:12 AM IST
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हॉवित्जर तोप
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लंबे समय से एम777 हॉवित्जर तोप का इंतजार कर रही भारतीय सेना के लिए इंतजार के पल खत्म होने वाले है। अमेरिका की बीएई कंपनी से खरीदी गई 145 हॉवित्जर तोप में से दो परीक्षण के लिए भारत पहुंच चुकी है।
विशेष विमान से बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंची दो तोपों को परीक्षण के लिए ट्रकों जरिए जैसलमेर के पोकरण के लिए रवाना कर दिया गया। उम्मीद जताई जा रही है कि दो-तीन दिनों में यह पोकरण पहुंच जाएगी। सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार अगले करीब डेढ़ माह तक इन तोपों का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण मुख्य रुप से भारत में निर्मित गोलों के लिए किया जा रहा है। पोकरण फील्ड रेंज में होने वाले परीक्षण पर सभी की निगाहें टिकी है। परीक्षण के लिए भारतीय सेना का एक दल लेफ्टिनेंट कर्नल की अगुवाई में जैसलमेर पहुंच गया है।
करीब तीस वर्ष भारतीय सेना को मिल रही नई तोप अभी तक सेना में सम्मलित बोफोर्स तोप से बहुत हल्की है। करीब चार टन वजनी हॉवित्जर तोप को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। गौरतलब है कि हॉवित्जर तोपों ने ही अमेरिका की सेना को ईराक और अफगानिस्तान का युद्ध जिताने में महत्ती भूमिका अदा की थी। दुनिया में अमेरिकी सेना के अतिरिक्त ये तोपें आॅस्ट्रेलिया और कनाडा की सेना इस्तेमाल करती है।
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विशेष विमान से बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंची दो तोपों को परीक्षण के लिए ट्रकों जरिए जैसलमेर के पोकरण के लिए रवाना कर दिया गया। उम्मीद जताई जा रही है कि दो-तीन दिनों में यह पोकरण पहुंच जाएगी। सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार अगले करीब डेढ़ माह तक इन तोपों का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण मुख्य रुप से भारत में निर्मित गोलों के लिए किया जा रहा है। पोकरण फील्ड रेंज में होने वाले परीक्षण पर सभी की निगाहें टिकी है। परीक्षण के लिए भारतीय सेना का एक दल लेफ्टिनेंट कर्नल की अगुवाई में जैसलमेर पहुंच गया है।
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करीब तीस वर्ष भारतीय सेना को मिल रही नई तोप अभी तक सेना में सम्मलित बोफोर्स तोप से बहुत हल्की है। करीब चार टन वजनी हॉवित्जर तोप को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। गौरतलब है कि हॉवित्जर तोपों ने ही अमेरिका की सेना को ईराक और अफगानिस्तान का युद्ध जिताने में महत्ती भूमिका अदा की थी। दुनिया में अमेरिकी सेना के अतिरिक्त ये तोपें आॅस्ट्रेलिया और कनाडा की सेना इस्तेमाल करती है।
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