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27 साल पहले दंगे में हुए नुकसान की भरपाई 18 फीसदी ब्याज से करनी होगी

Sat, 02 Sep 2017 05:34 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 02 Sep 2017 05:34 PM IST
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highocurt hearing at communal riots
राजस्थान हाईकोर्ट ने 1990 के साम्प्रदायिक दंगे के दौरान हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति राशि बीमा कंपनी को 18 फीसदी ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। 
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इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत के ब्याज 9 फीसदी देने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश डीसी सोमानी की एकलपीठ ने यह आदेश मैसर्स राजेश कार्पेट्स के पार्टनर केसरलाल कोली की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। यूनाईटेड इंडिया बीमा कंपनी की ओर से अधिवक्ता प्रवीण बलवदा और अधिवक्ता मोहित बलवदा ने बताया कि याचिकाकर्ता ने 8 अगस्त 1990 को अपनी फर्म का छह लाख रुपए का बीमा कराया था। जयपुर शहर में 24 अक्टूबर 1990 को हुए साम्प्रदायिक दंगे में दंगाइयों ने उसकी फर्म को आग लगा दी और फर्म के पार्टनर व चौकीदार को जान से मार दिया।
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घटना पर बीमा कंपनी ने केवल एक लाख छह हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने की जिम्मेदारी मानी। वहीं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने प्रकरण को सुनवाई के लिए आब्रिट्रेटर के पास भेज दिया। जहां दो आब्रिट्रेटर ने अलग-अलग फैसले दिए। ऐसे में अधिवक्ता कमलाकर शर्मा को अम्पायर नियुक्त किया गया। अम्पायर ने 5 लाख 24 हजार 500 रुपए का अवार्ड जारी किया और इस राशि पर घटना की तिथि से 18 फीसदी ब्याज भी तय किया। बीमा कंपनी की अपील पर जिला न्यायालय क्रम-5 ने ब्याज राशि घटाकर नौ फीसदी कर दी। जिसे याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए अम्पायर के आदेश को बहाल करते हुए घटना की तिथि से रकम अदायगी तक 18 फीसदी ब्याज अदा करने को कहा है।
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