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गैर खेल गतिविधियां नहीं होने का शपथ पत्र दें जेडीए
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 14 Jul 2017 08:51 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने खेल मैदानों को गैर खेल गतिविधियों के लिए काम में नहीं लेने के संबंध में जेडीए को शपथ पत्र पेश करने को कहा है। साथ ही अदालत ने विधि विभाग को कहा है कि वह लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को अन्य खेलों पर लागू करने के लिए खेल अधिनियम में संशोधन के लिए चल रही प्रक्रिया को पूरी करे।
इसके साथ ही अदालत ने आरसीए लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र और एथिक्स ऑफिसर जस्टिस पानाचंद जैन को अपने पद पर यथावत काम करने को कहा है। अदालत ने पक्षकारों को छूट दी है कि वह चाहे तो दोनों अधिकारियों को पद से हटाने के लिए पत्र जारी करने वाले आरसीए पदाधिकारी को अवमानना कार्रवाई के लिए पक्षकार बना सकते हैं।
न्यायाधीश जेके रांका की एकलपीठ ने यह आदेश रामपाल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव जेसी मोहंती, विधि सचिव और सहकारिता रजिस्ट्रार सहित जेडीसी अदालत में पेश हुए।
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सरकार की ओर से कहा गया कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए जस्टिस एनके जैन कमेटी का गठन किया गया है। प्रदेश में खेल अधिनियम लागू है, इसलिए कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए खेल अधिनियम में संशोधन करना पड़ेगा। ऐसे में प्रकरण को विधि विभाग भेजा गया है। जहां अधिनियम में संशोधन कराने के लिए कार्रवाई चल रही है।
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इसके साथ ही अदालत ने आरसीए लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र और एथिक्स ऑफिसर जस्टिस पानाचंद जैन को अपने पद पर यथावत काम करने को कहा है। अदालत ने पक्षकारों को छूट दी है कि वह चाहे तो दोनों अधिकारियों को पद से हटाने के लिए पत्र जारी करने वाले आरसीए पदाधिकारी को अवमानना कार्रवाई के लिए पक्षकार बना सकते हैं।
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न्यायाधीश जेके रांका की एकलपीठ ने यह आदेश रामपाल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव जेसी मोहंती, विधि सचिव और सहकारिता रजिस्ट्रार सहित जेडीसी अदालत में पेश हुए।
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सरकार की ओर से कहा गया कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए जस्टिस एनके जैन कमेटी का गठन किया गया है। प्रदेश में खेल अधिनियम लागू है, इसलिए कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए खेल अधिनियम में संशोधन करना पड़ेगा। ऐसे में प्रकरण को विधि विभाग भेजा गया है। जहां अधिनियम में संशोधन कराने के लिए कार्रवाई चल रही है।
जेडीए ने ये दिया जवाब
वहीं अदालत के पूछने पर जेडीए की ओर से कहा गया कि साल में 30-35 दिन खेल मैदान में अन्य गतिविधियां संचालित की जाती है। इस पर अदालत ने कहा कि मैदान में केवल खेल ही आयोजित किए जाए।
सुनवाई के दौरान आरसीए कोषाध्यक्ष पिंकेश जैन की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर ने कार्यकारी सचिव के तौर पर पत्र जारी कर लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र और एथिक्स ऑफिसर जस्टिस पानाचंद जैन को काम करने से रोक दिया गया है। दोनों अधिकारी उच्चतम न्यायालय के आदेश से काम कर रहे हैं। ऐसे में नाहर का यह कृत्य अवमानना की श्रेणी में आता है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों अधिकारियों अपने पदों पर यथावत काम करने को कहा है।
अदालत प्रकरण में अब 21 जुलाई को सुनवाई करेगी।