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जज अदालत चला सकते हैं तो क्रिकेट भी खिला सकते हैं, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 05 Oct 2017 07:52 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने आरसीए में चल रहे विवाद के मामले के कहा कि जब तक आरसीए अपने आंतरिक मतभेद समाप्त नहीं करेगा, तब तक न तो बीसीसीआई से निलंबन समाप्त होगा और न ही कुछ और काम हो पाएगा। इसके साथ ही अदालत ने बीसीसीआई के प्रार्थना पत्र को मंजूर करते हुए उसे सहयोगी स्टाफ को बदलने की छूट दे दी है। वहीं सुनवाई के दौरान आरएस नांदू की ओर से कहा आगामी सुनवाई तक उनकी ओर से आरसीए की निलंबन को लेकर बीसीसीआई के खिलाफ लंबित दावे को वापस ले लिया जाएगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 25 अक्टूबर को तय की है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयपुर जिला क्रिकेट संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अदालत का रुख साफ है कि खेल के विकास के लिए यदि आपस में विवाद तय नहीं किया गया तो अदालत इसमें हस्तक्षेप करेगा। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई पदाधिकारी कोर्ट से खेलना चाहेगा तो कोर्ट उचित कदम उठाएगी। अदालत ने कहा कि जब जज कोर्ट चला सकते हैं तो क्रिकेट भी खिला सकते हैं।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयपुर जिला क्रिकेट संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अदालत का रुख साफ है कि खेल के विकास के लिए यदि आपस में विवाद तय नहीं किया गया तो अदालत इसमें हस्तक्षेप करेगा। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई पदाधिकारी कोर्ट से खेलना चाहेगा तो कोर्ट उचित कदम उठाएगी। अदालत ने कहा कि जब जज कोर्ट चला सकते हैं तो क्रिकेट भी खिला सकते हैं।
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