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मास्टर प्लान पर कोर्ट सख्त, कहा- आदेशों को हल्के में ले रही है सरकार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 29 May 2017 04:47 PM IST
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जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के छह प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान की दुर्दशा को लेकर दायर जनहित याचिका के मामले में सोमवार को सरकार की ओर से पालना रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार को एक मौका और दिया है। हाईकोर्ट ने दो जून को आदेशों की पालना रिपोर्ट अक्षरत पेश करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश अरुण भंसाली की खण्डपीठ ने ये आदेश दिए। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एनएम लोढा व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने पालना रिपोर्ट पेश की। इस पर जस्टिस लोढ़ा ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार कोर्ट के आदेशों को हल्के में ले रही है। इस बीच न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस.सिंघवी व याचिकाकर्ता पीसी भण्डारी ने कहा कि सरकार अवैध अतिक्रमणों को रेगुलराइज करने की तैयारी कर रही है।
हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि आम जनता के दर्द को देखो। व्यक्तिगत हितों के लिए भू—उपयोग परिवर्तन किसी सूरत में ना किया जाए, जबकि पालना रिपोर्ट से लगता है कि सरकार केवल भू—उपयोग परिवर्तन के लिए गलियां ढूंढ रही है। गलत करने के लिए रास्ते निकाले जा रहे हैं, लेकिन जनहित नहीं देखा जा रहा है। हाईकोर्ट ने 90—ए की कार्रवाई पर भी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने इस पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई थी। सरकार को व्यापक जनहित के बिना इसमें फेरबदल करने का अधिकार नहीं है।
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अब दो जून को जोधपुर मुख्यपीठ में अधिवक्ता का न्यायिक बहिष्कार होने के बावजूद मामले में सुनवाई होगी।
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न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश अरुण भंसाली की खण्डपीठ ने ये आदेश दिए। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एनएम लोढा व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने पालना रिपोर्ट पेश की। इस पर जस्टिस लोढ़ा ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार कोर्ट के आदेशों को हल्के में ले रही है। इस बीच न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस.सिंघवी व याचिकाकर्ता पीसी भण्डारी ने कहा कि सरकार अवैध अतिक्रमणों को रेगुलराइज करने की तैयारी कर रही है।
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हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि आम जनता के दर्द को देखो। व्यक्तिगत हितों के लिए भू—उपयोग परिवर्तन किसी सूरत में ना किया जाए, जबकि पालना रिपोर्ट से लगता है कि सरकार केवल भू—उपयोग परिवर्तन के लिए गलियां ढूंढ रही है। गलत करने के लिए रास्ते निकाले जा रहे हैं, लेकिन जनहित नहीं देखा जा रहा है। हाईकोर्ट ने 90—ए की कार्रवाई पर भी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने इस पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई थी। सरकार को व्यापक जनहित के बिना इसमें फेरबदल करने का अधिकार नहीं है।
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अब दो जून को जोधपुर मुख्यपीठ में अधिवक्ता का न्यायिक बहिष्कार होने के बावजूद मामले में सुनवाई होगी।