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हाईकोर्ट बोला, क्या प्रदेश में कोई जल नीति नहीं है
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 17 Apr 2017 09:14 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में जल संरक्षण से जुड़े मामले पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि क्या प्रदेश में कोई जल नीति नहीं है।
सीजे प्रदीप नंद्राजोग की खंडपीठ में सोमवार को जल संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर कोई जल नीति नहीं है। साथ ही नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्यों कोर्ट को ही मामले में मॉनिटरिंग करनी पड़ेगी। इस पर सरकार ने कोर्ट को बताया कि जल संरक्षण को लेकर वर्ष 2012 और 2015 में कानून बनाए हैं। इस दौरान याचिकाकर्ता महेश पारीक की ओर से सरकार के इस जवाब पर बताया गया कि सरकार इन कानूनों को लागू नहीं कर रही है। यह सुनकर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नीति बनाकर इन कानूनों को क्यों लागू नहीं किया जा रहा है। अब मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि माना जाता है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए ही होगा। इसके बावजूद राज्य सरकार प्रकरण में गंभीरता नहीं दिखा रही। राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि पेयजल का दुरुपयोग रोकने के लिए 2013 में राजस्थान वाटर रिसोर्सेज रेगुलेटरी एक्ट और 2015 में राजस्थान रिवर बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग एक्ट बनाया है, लेकिन अब तक दोनों कानूनों को लागू नहीं किया गया है।
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सीजे प्रदीप नंद्राजोग की खंडपीठ में सोमवार को जल संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर कोई जल नीति नहीं है। साथ ही नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्यों कोर्ट को ही मामले में मॉनिटरिंग करनी पड़ेगी। इस पर सरकार ने कोर्ट को बताया कि जल संरक्षण को लेकर वर्ष 2012 और 2015 में कानून बनाए हैं। इस दौरान याचिकाकर्ता महेश पारीक की ओर से सरकार के इस जवाब पर बताया गया कि सरकार इन कानूनों को लागू नहीं कर रही है। यह सुनकर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नीति बनाकर इन कानूनों को क्यों लागू नहीं किया जा रहा है। अब मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि माना जाता है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए ही होगा। इसके बावजूद राज्य सरकार प्रकरण में गंभीरता नहीं दिखा रही। राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि पेयजल का दुरुपयोग रोकने के लिए 2013 में राजस्थान वाटर रिसोर्सेज रेगुलेटरी एक्ट और 2015 में राजस्थान रिवर बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग एक्ट बनाया है, लेकिन अब तक दोनों कानूनों को लागू नहीं किया गया है।
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