फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   High Court restrains the government from ordering,

हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई रोक, नियमन पर संकट

Thu, 06 Jul 2017 07:14 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 06 Jul 2017 07:14 PM IST
विज्ञापन
High Court restrains the government from ordering,
राजस्थान हाईकोर्ट ने नगरीय विकास विभाग के गत 24 मई के उस सर्कुलर पर रोक लगा दी है, जिसमें 27 जून 1999 के बाद एसटी व एससी की भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन करने का प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस सर्कुलर के आधार पर कितने नियमन किए गए हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश अमरचंद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता की भूमि को पीआरएन योजना के तहत अवाप्त किया गया था। समझौते के तहत जेडीए को पन्द्रह फीसदी विकसित भूमि देनी थी, लेकिन जेडीए ने भूमि देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता के पिता ने इस भूमि को पूर्व में किसी सोसायटी को एग्रीमेंट के जरिए बेच दी है। याचिका में कहा गया कि एग्रीमेंट फर्जी बनाया गया है। इस संबंध में उसकी ओर से एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। ऐसे में उसे मुआवजा या पन्द्रह फीसदी विकसित भूमि दी जाए।
विज्ञापन


याचिका में यह भी कहा गया कि काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 के तहत एससी या एसटी की भूमि सामान्य वर्ग को आवंटित नहीं की जा सकती है। वहीं राज्य सरकार की ओर से गत 24 मई का यूडीएच विभाग का सर्कुलर पेश कर कहा गया कि 27 जून 1999 के बाद एसटी या एससी वर्ग की भूमि पर बसी कॉलोनियों का पट्टा जारी किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने सर्कुलर पर रोक लगाते हुए पूछा है कि अब तक सर्कुलर के आधार पर कितने नियमन किए गए हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed