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यहां रात नहीं दिन में होता है कान्हा का जन्म
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 15 Aug 2017 01:27 PM IST
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राधा दामोदर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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कृष्ण जन्माष्टमी की धूम कृष्ण मंदिरों में देखने को मिल रही है। रात बारह बजे कन्हैया नंद के घर जन्म लेंगे। मंदिरों में घंटे घड़ियालों की आवाज के बीच कान्हा का जन्म होगा। लेकिन एक मंदिर ऐसा भी है जहां दिन के बारह बजे ही कान्हा का जन्म हो गया।
जयपुर के जहां भगवान कृष्ण का जन्म दोपहर में ठीक 12 बजे होता है। यह मंदिर चौड़ा रास्ता में स्थित है। राधा दामोदर मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव रात बारह बजे नहीं बल्कि दिन में बारह बजे ही हो जाता है। कृष्ण जन्म पर यहां धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है। दिन में कृष्ण जन्म की परम्परा आज की नहीं बल्कि पांच सौ साल पुरानी है।
दिन में कृष्ण जन्म के बाद ठाकुर का अभिषेक होता है और मंदिर के पट रात 11.50 से पहले बंद हो जाते हैं। जहां तक बात दिन में जन्मोत्सव की है, उसके पीछे अपना एक अलग तर्क है। मान्यता है कि इस मंदिर में कृष्ण के बाल अवतार को विराजित किया गया है। बाल अवतार के उठने का समय रात में बारह बजे का नहीं होता। ऐसे में दिन में ही अभिषेक कर उन्हें उठाया और जन्मोत्सव मनाया जाता है।
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जयपुर के जहां भगवान कृष्ण का जन्म दोपहर में ठीक 12 बजे होता है। यह मंदिर चौड़ा रास्ता में स्थित है। राधा दामोदर मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव रात बारह बजे नहीं बल्कि दिन में बारह बजे ही हो जाता है। कृष्ण जन्म पर यहां धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है। दिन में कृष्ण जन्म की परम्परा आज की नहीं बल्कि पांच सौ साल पुरानी है।
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दिन में कृष्ण जन्म के बाद ठाकुर का अभिषेक होता है और मंदिर के पट रात 11.50 से पहले बंद हो जाते हैं। जहां तक बात दिन में जन्मोत्सव की है, उसके पीछे अपना एक अलग तर्क है। मान्यता है कि इस मंदिर में कृष्ण के बाल अवतार को विराजित किया गया है। बाल अवतार के उठने का समय रात में बारह बजे का नहीं होता। ऐसे में दिन में ही अभिषेक कर उन्हें उठाया और जन्मोत्सव मनाया जाता है।
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