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'आप दोनों पति-पत्नी एचआईवी पॉजिटिव हो', यह सुनते ही...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 18 Nov 2017 10:44 AM IST
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एड्स पर फैसला
चिकित्सकों का कहना है कि एचआईवी पॉजिटिव इंसान बीमारी के बजाय उसके भय के कारण मौत की ओर तेजी से बढ़ता है। हाल ही में कोटा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
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दरअसल कोटा डकरिया स्टेशन निवासी एक दिव्यांग और उसकी पत्नी को सरकारी डिस्पेंसरी में हुई जांच के बाद एचआईवी पॉजिटिव घोषित कर दिया गया। डॉक्टर ने जैसे ही उन्हें यह जानकारी दी दोनों का डर के मारे बुरा हाल हो गया। कई दिनों तक घर में ही कैद रहे और रोते रहे। लेकिन जब दिव्यांग के बड़े भाई को इसके बारे में पता चला तो उसने दोनों का एचआईवी टेस्ट शहर के एक निजी लैब में कराया।
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निजी लैब की रिपोर्ट के बाद हुआ ये...
डेमो पिक: एचआईवी संक्रमित
- फोटो : Getty
निजी लैब की रिपोर्ट आने के बाद पता लगा कि सरकारी डिस्पेंसरी की रिपोर्ट गलत थी। पति-पत्नी एचआईवी पॉजिटिव नहीं। यहीं नहीं पीड़ितों ने शहर के अन्य दो बड़ी प्राईवेट लैब में टेस्ट कराया, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव ही आई।
इधर, सरकारी डिस्पेंसरी के जिस चिकित्सक ने रिपोर्ट पॉजिटिव बताई थी उसका कहना है कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। इसके लिए लैब टेक्निशियन जिम्मेदार है। विज्ञान नगर डिस्पेंसरी के डॉ. केशव गुप्ता का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि टेक्निशयन ने गलत रिपोर्ट कैसे बना दी।
इधर, सरकारी डिस्पेंसरी के जिस चिकित्सक ने रिपोर्ट पॉजिटिव बताई थी उसका कहना है कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। इसके लिए लैब टेक्निशियन जिम्मेदार है। विज्ञान नगर डिस्पेंसरी के डॉ. केशव गुप्ता का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि टेक्निशयन ने गलत रिपोर्ट कैसे बना दी।
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दवा पहुंचा सकती थी नुकसान
फाइल फोटो।
एचआईवी मामलों के जानकार बताते हैं इस सरकारी डिस्पेंसरी की ये गलती काफी महंगी साबित हो सकती थी। यदि एचआईवी पॉजिटिव समझकर इनकी दवाइयां शुरू कर दी जातीं, तो शारीरिक रूप से इन्हें नुकसान पहुंच सकता था।
उनके अनुसार एआरटी की दवाई सीधा लीवर पर प्रभाव डालती है। इसके अतिरिक्त संबंधित लोगों को एचआईवी होने की गलत जानकारी दे दी जाए तो संबंधित लोग मानसिक अवसाद की स्थिति में भी पहुंच सकते हैं।
उनके अनुसार एआरटी की दवाई सीधा लीवर पर प्रभाव डालती है। इसके अतिरिक्त संबंधित लोगों को एचआईवी होने की गलत जानकारी दे दी जाए तो संबंधित लोग मानसिक अवसाद की स्थिति में भी पहुंच सकते हैं।