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प्रदेश में कुपोषण रोकने के लिए स्वास्थय विभाग ने किए एमओयू

Sun, 04 Jun 2017 09:47 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sun, 04 Jun 2017 09:47 AM IST
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health department signed mou to prevent malnutrition in the state
एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ एवं अन्य अधिकारी - फोटो : amar ujala
राजस्थान में कुपोषण को रोकने के लिए स्वास्थ विभाग ने बाल विकास संस्थाओं के साथ एमओयू किए हैं। कुपोषण के खिलाफ जंग में विभाग सरकार की एकीकृत बाल विकास संस्था आईसीडीएस यानि इंटिग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज और गेन,एसीएफ और टाटा ट्रस्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद लेगा। जानकारी के अनुसार पिछले 10 सालों में प्रदेश में कई बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं और ये आंकड़ा लगातार बढ़ भी रहा है।
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एमओयू के बाद विभाग का लक्ष्य 6 वर्ष तक के बच्चों की पोषण और स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाने पर होगा। इसके अलावा स्वास्थ विभाग बच्चों की स्वास्थ स्थिती और पोषण में सुधार करने के साथ साथ उनका सामाजिक,मानसिक और शारीरिक विकास का भी ध्यान रखेगा। जायेगा 
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विभाग के साथ एमओयू करने वाली संस्थाएं मृत्यु दर, रोग, कुपोषण और बच्चों के स्कूल छोड़कर मजदूरी करने जैसे मामलों पर रोकथाम के भी काम करेगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ मंत्री कालीचरण सराफ ने इस एमओयू पर खुशी जाहिर करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रदेश की भावी पीढ़ी के कुपोषण की समस्या का समाधान होगा एवं बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
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मिशन निदेशक नवीन जैन ने बताया कि आज हुए एमओयू के अनुसार प्रदेश के कुपोषण उपचार केन्द्रों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों को टाटा ट्रस्ट, गेन व एसीएफ द्वारा तकनीकी एवं अन्य सहयोग प्रदान किया जाएगा। आईसीडीएस द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण गतिविधियों के साथ ही अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें उपचार के लिए एमटीसी में भेजा जाएगा।

गेन द्वारा एमआईएस प्लेटफॉर्म बनाने के साथ ही प्रत्येक बच्चे के तथ्यों का संकलन व प्रबंधन किया जाएगा। एसीएफ द्वारा आशाओं व एएनएम सहित अन्य कर्मियों का क्षमता संवर्द्धन किया जाएगा तथा प्रशिक्षण सहित बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन की कार्यवाही की जाएगी। टाटा ट्रस्ट द्वारा पूरक आहार उपलब्ध कराने के साथ ही तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। 


जैन ने बताया कि अति गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या में हो रही इस वृद्धि को ध्यान में रखते हुए समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम का प्रथम चरण संचालित किया गया। दिसम्बर 2015 से जून 2016 के दौरान विशेषज्ञों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए इस कार्यक्रम से चिन्हित 9 हजार 640 बच्चों में से 9 हजार 117 बच्चों को अति गंभीर कुपोषण से मुक्त किया गया। पोषण द्वितीय का संचालन प्रदेश के 20 जिले के 50 ब्लाॅक में किया जाएगा एवं इसके तहत लगभग 16 हजार 500 बच्चों को अति गंभीर कुपोषण से मुक्त किया जाएगा। 
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