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गुर्जर आंदोलनः फिर पटरियों पर बैठेंगे गुर्जर, सिकंदरा में आज श्रद्धांजलि सभा

Wed, 24 May 2017 12:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 24 May 2017 12:56 PM IST
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Gujjar agitation: Gujjars will sit on tracks again, tribute meeting today in Sikandara
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुआ कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और कैप्टन हर प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के गुर्जरों ने आरक्षण आंदोलन 10 दिन बाद भरतपुर के पीलू का पुरा से शुरू करने की चेतावनी दे दी है। यहीं से मुम्बई-दिल्ली वाया कोटा रेलवे ट्रेक है। गुर्जर समाज इसी जगह आंदोलन करता है और जब भी आंदोलन हुआ है। रेल पटरियों को उखाड़ा गया है, जिससे ये लाइन ट्रेनों के लिए ठप्प हो जाती है। गुर्जरों की चेतावनी से ये ट्रेक फिर से ठप्प होने की आशंका बढ़ गई है।
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भाजपा के पिछले कार्यकाल में शुरू हुआ ये आंदोलन हुआ था, भाजपा के दूसरे कार्यकाल में भी सबसे बडी मुश्किल बना हुआ है। गुर्जर समाज आरक्षण आंदोलन वापस शुरू करने की तैयारी कर रहा है। वर्ष 2007-2008 में हुए उग्र आंदोलन में समाज के 72 मारे गए थे, जिन्हें समाज शहीद के रूप में याद करता है। जहां-जहां ये मौते हुई थीं, वहां-वहां श्रद्धांजलि सभा आयोजित करता है। इन सभाओं में ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार कि जाएगी। इन श्रद्धाजलि सभाओं से समाज को आंदोलन के लिए फिर एकजुट किया जा रहा है।
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एक दिन पूर्व ही गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने आंदोलन के संबंध में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पत्र भेजा है। पत्र में कहा है कि सरकार ने गुर्जरों के साथ धोखा किया है। इससे समाज में खासी नाराजगी है। पीलू का पुरा में 10 दिन बाद आंदोलन का आगाज होगा।
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गुर्जर समाज की बुधवार को दौसा के सिकंदरा में श्रद्धांजलि सभा होगी। वर्ष 2008 में हुए आंदोलन के दौरान यहां 21 लोगों की मौत हो गई थी। समाज ने मंगलवार को पीलू का पुरा में श्रद्धांजलि सभा की थी, यहां 18 लोगों की मौत हुई थी। इसी प्रकार 29 मई को पाटोली और पीपल खेड़ा में श्रद्धाजलि सभाएं होंगी और इसके बाद 1 जून को लालसोट में।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले दिनों एक अधिसूचना जारी कर राजस्थान में गुर्जर सहित पांच जातियों को 13 साल बाद पुन: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण कोटे में शामिल कर लिया गया है। ये जातियां ओबीसी में भी अस्थाई रूप से शामिल हो पाई हैं। इससे पहले इन जातियों विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) आरक्षण कोटे में शामिल थी। इन जातियों को ओबीसी में अस्थायी तौर पर शामिल किया गया है क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लम्बित है।


इस अधिसूचना से गुर्जर समाज नाराज है। समाज कहना है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। गुर्जर आरक्षण सघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह गुर्जर का कहना है कि सरकार ने 13 साल के सघंर्ष और 72 लोगों के बलिदान के बाद एक बार फिर वहीं लाकर खडा़ कर दिया। हम लोगों को सरकार ने धोखा दिया है। हम सरकार से आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही अलग से आरक्षण चाहते थे, लेकिन सरकार बार-बार हमें आरक्षण की सीमा लांघ कर आरक्षण दे रही है और इसका पुख्ता रास्ता नहीं निकाल रही है।
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