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कोर्ट ने कहा हल्के में ना लें, सरकार को याद आई जल नीति

Mon, 24 Apr 2017 07:32 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 24 Apr 2017 07:32 PM IST
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government answaring the court about water policy
राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पानी का दुरूपयोग रोकने के लिए विस्तृत जल नीति बनाई जा रही है।
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सरकार की ओर से नीति पेश करने के लिए तीन माह का समय मांगा गया। इस पर अदालत ने कहा कि पेयजल का गंभीर मामला है। सरकार इसे हल्के में न लेकर बार-बार तारीख ना ले। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई जुलाई माह के अंतिम सप्ताह तक टालते हुए नीति पेश करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग और न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश महेश पारीक की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
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सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पुराने कानूनों को देखते हुए जल संरक्षण के लिए विस्तृत जल नीति बनाई जा रही है। इसके लिए गत 5 अप्रैल को जल संसाधन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई है। ऐसे में नीति पेश करने के लिए तीन माह का समय दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने 2012 में जल कानून बनाया था, लेकिन इसे अभी तक लागू ही नहीं किया गया। इससे मामले की गंभीरता को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट नजर आती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को समय देते हुए संबंधित नीति पेश करने के आदेश दिए हैं।
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