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आनंदपाल एनकाउंटर: डेढ़ साल से पुलिस को इस तरह छकाता रहा ये गैंगस्टर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:22 PM IST
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आनंदपाल सिंह
- फोटो : File
कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल को राजस्थान पुलिस ने शनिवार देर रात मार गिराया है। राजस्थान पुलिस को इस सफलता से पहले डेढ़ साल में कम से कम सात बार असफलता हाथ लगी। पुलिस और एसओजी के पहुंचने से पहले वह फरार हो जाता था।
आनंदपाल सिंह अजमेर हाई सिक्युरिटी जेल में बंद था और पेशी पर नागौर लाते समय परबतसर से 23 सितंबर 2015 को वह षड़यत्रपूर्वक फरार हो गया था। इस दौरान उसने पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाकर बेहोश किया था तथा पुलिस की एके 47 भी ले भागा था। इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही।
इस मामले में सरकार की खासी बदनामी हुई। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया विधानसभा में कई बार इस मुद्दे पर घिरे। उन्होंने इसे जिन्दा पकड़ने का भरोसा दिलाया। उसके बाद एसओजी ने कई जगह दबीश दी, लेकिन वह टीम के पहुंचने से पहले भाग जाता। उसकी पैठ पुलिस महकमे में भी थी, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई की जानकारी उसे पहले से मिल जाती थी। आनंदपाल अपना हुलिया बदलने में माहिर था। वह गाड़ियां बदलकर सफर करता था।
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आनंदपाल सिंह अजमेर हाई सिक्युरिटी जेल में बंद था और पेशी पर नागौर लाते समय परबतसर से 23 सितंबर 2015 को वह षड़यत्रपूर्वक फरार हो गया था। इस दौरान उसने पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाकर बेहोश किया था तथा पुलिस की एके 47 भी ले भागा था। इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही।
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इस मामले में सरकार की खासी बदनामी हुई। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया विधानसभा में कई बार इस मुद्दे पर घिरे। उन्होंने इसे जिन्दा पकड़ने का भरोसा दिलाया। उसके बाद एसओजी ने कई जगह दबीश दी, लेकिन वह टीम के पहुंचने से पहले भाग जाता। उसकी पैठ पुलिस महकमे में भी थी, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई की जानकारी उसे पहले से मिल जाती थी। आनंदपाल अपना हुलिया बदलने में माहिर था। वह गाड़ियां बदलकर सफर करता था।
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डेढ़ साल में पुलिस ने 300 जगहों पर मारे थे छापें
मौत के समय एकदम क्लीन शेव था गैंगस्टर आनंदपाल
- फोटो : amar ujala
एसओजी और राजस्थान पुलिस के अनुसार, डेढ़ साल में पुलिस ने कम से 300 जगहों पर उसे और उसके साथियों को पकड़ने के लिए छापे मारे। सात बार ऐसा हुआ है जब वह पुलिस के पहुंचने से पहले फरार हो गया।
परबतसर से फरार होने के बाद पहली बार फरवरी 2016 में एसओजी को आनंदपाल सिंह के जोधपुर में होने का पुख्ता सबूत मिला। जयनारायण व्यास विवि, जोधपुर के जसवंत हॉस्टल में वह दो माह रुका। पुलिस को पता नहीं चला। उसके वहां से जाने के बाद हॉस्टल के दो लड़कों को पुलिस ने अरेस्ट किया।
इसके बाद उसके नगौर में आने की सूचना मिली। 2 मार्च, 2016 को आनंदपाल सिंह नागौर, जसवंतगढ़ गुढ़ा भगवानदास में चकमा देकर भाग गया। इस दौरान मुठभेड़ भी हुई जिसमें पुलिस का एक जवान मारा गया।
जुलाई 2016 में जसवंतगढ़ में ही फिर आनंदपाल और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान उसने फायर कर थानाधिकारी लादूसिंह को घायल कर दिया और वह भाग निकला।
अगस्त 2016 को आनंदपाल सिंह के जयपुर में होने की सूचना मिली। छापामारी हुई लेकिन उसका पता नहीं चला। बाद में उसके मकराना जाने की बात सामने आई। वहां भी कुछ नहीं मिा।
अगस्त 2016 में आनंदपाल सिंह की लोकेशन बीकानेर के झज्जू में मिली। आनंदपाल ने यहां 15 दिन बिताए। 24 अगस्त को पुलिस ने यहां दबिश दी, लेकिन वह भाग निकला। इस मामले में पांच लोगों को अरेस्ट किया।
सितंबर 2016 में उसकी लोकेशन जोधपुर के बाप इलाके के शेखासर में मिली। उसने यहां एक फार्महाउस में अपना डेरा बना रखा था। दबिश से पहले वह फरार हो गया। इसके बाद जनवरी 2017 में उसकी लोकेशन फिर बीकानेर एवं जोधपुर में मिली,लेकिन सूचना के बावजूद पुलिस उसे वहां ढूंढ नहीं पाई।
बताया जा रहा है कि उसने फरारी का अधिकांश समय बीकानेर में काटा है। इस दौरान उसने हाड़ला गांव में भी कुछ दिन बिताए। राजस्थान के बाहर भी ग्वालियर और हरियाणा में आता—जाता रहा था।
परबतसर से फरार होने के बाद पहली बार फरवरी 2016 में एसओजी को आनंदपाल सिंह के जोधपुर में होने का पुख्ता सबूत मिला। जयनारायण व्यास विवि, जोधपुर के जसवंत हॉस्टल में वह दो माह रुका। पुलिस को पता नहीं चला। उसके वहां से जाने के बाद हॉस्टल के दो लड़कों को पुलिस ने अरेस्ट किया।
इसके बाद उसके नगौर में आने की सूचना मिली। 2 मार्च, 2016 को आनंदपाल सिंह नागौर, जसवंतगढ़ गुढ़ा भगवानदास में चकमा देकर भाग गया। इस दौरान मुठभेड़ भी हुई जिसमें पुलिस का एक जवान मारा गया।
जुलाई 2016 में जसवंतगढ़ में ही फिर आनंदपाल और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान उसने फायर कर थानाधिकारी लादूसिंह को घायल कर दिया और वह भाग निकला।
अगस्त 2016 को आनंदपाल सिंह के जयपुर में होने की सूचना मिली। छापामारी हुई लेकिन उसका पता नहीं चला। बाद में उसके मकराना जाने की बात सामने आई। वहां भी कुछ नहीं मिा।
अगस्त 2016 में आनंदपाल सिंह की लोकेशन बीकानेर के झज्जू में मिली। आनंदपाल ने यहां 15 दिन बिताए। 24 अगस्त को पुलिस ने यहां दबिश दी, लेकिन वह भाग निकला। इस मामले में पांच लोगों को अरेस्ट किया।
सितंबर 2016 में उसकी लोकेशन जोधपुर के बाप इलाके के शेखासर में मिली। उसने यहां एक फार्महाउस में अपना डेरा बना रखा था। दबिश से पहले वह फरार हो गया। इसके बाद जनवरी 2017 में उसकी लोकेशन फिर बीकानेर एवं जोधपुर में मिली,लेकिन सूचना के बावजूद पुलिस उसे वहां ढूंढ नहीं पाई।
बताया जा रहा है कि उसने फरारी का अधिकांश समय बीकानेर में काटा है। इस दौरान उसने हाड़ला गांव में भी कुछ दिन बिताए। राजस्थान के बाहर भी ग्वालियर और हरियाणा में आता—जाता रहा था।