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कट्टरपंथियों ने जैनुअल आबेदीन के खिलाफ फिर रचा षड़यंत्र
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 07 Apr 2017 02:34 PM IST
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दरगाह दीवान
- फोटो : अमर उजाला
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मुसलमानों से बीफ नहीं खाने का आह्वान और तीन तलाक का विरोध करने वाले अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन के खिलाफ कट्टरपंथियों ने बृहस्पतिवार को षड़यंत्र रचा। भनक लगते ही आबेदीन ने पत्र लिखकर एडीएम सिटी के जरिए अलीमुद्दीन अलीमी सहित पांच जनों को पाबंद करवाया है।
ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में बृहस्पतिवार रात में होने वाली महफिल दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन की सदारत में होती है। लेकिन आबेदीन ने उर्स के मौके पर खुद बीफ कभी नहीं खाने, मुसलमानों से बीफ छोड़ने के ऐलान के साथ कहा था कि किसी भी तरह का जानवर नहीं काटा जाना चाहिए। उन्होंने तीन तलाक का भी विरोध कर दिया था। इससे वहां का एक धड़ा उनसे नाराज हो गया था और बुधवार को हुए घटनाक्रम के तहत आबेदीन के भाई अलाउद्दीन अलीमी ने दीवान की गद्दी पर स्वयं को सज्जादनशीन घोषित कर दिया था।
षड़यंत्र के तहत आबेदीन से नाराज इस धड़े ने महफिल की रस्म आबेदीन के भाई सैयद अलीमुद्दीन अलीमी की सदारत में करवाने का मानस बनाया था। इसके तहत अलीमी को आबेदीन की गद्दी पर बैठकर अपना हक जताते हुए महफिल की रस्म अदा करवानी थी। लेकिन आबेदीन को कट्टरपंथियों के इस षड्यंत्र आ आभास हो गया।
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उन्होंने तुरंत एडीएम सिटी को पत्र लिखकर देर शाम उनके भाई सैयद अलीमुद्दीन अलीम खान, उस्मान घड़ियाली, काजी मुन्नवर, गुलाम रसूल और जराव अहमद को पाबंद भी करवा दिया ताकि वह महफिलखाने में आकर किसी तरह का विवाद खड़ा ना कर पाएं।
इस बीच आबेदीन ने महफिल शुरू होने से दो घंटे पहले आकर महफिलखाने में पहुंचकर अपनी गद्दी पर बैठ गए। दरगाह थानाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि दीवान के भाई सहित पांचों को नोटिस तामिल करवा दिया गया। अगर इसके बावजूद भी महफिल की रस्म में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गौरतलब है कि दरगार में चल रहे इस विवाद के बीच आबेदीन ने पत्रकारों से कहा था कि वे मरते दम तक दरगाह दीवान बने रहेंगे। ये अधिकार उन्हें उच्चतम न्यायालय के वर्ष 1987 में दिए आदेश के तहत मिले हैं। छोटे भाई को उन्हें इस पद से हटाने का कोई अधिकार ही नहीं है। इस तरह की हरकतें पवित्र दरगाह के लिए कलंक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि मरने के बाद बड़ा बेटा मेरा (जैनुअल अबेदीन) उत्तराधिकारी होगा।
जैनुअल आबेदीन ने पत्रकारों से यह भी कहा कि संकीर्ण विचारधारा और कट्टरपंथियों को उनके विचार कभी पसंद नहीं आते हैं। चाहे बयान गाय पर हो या तीन तलाक पर या फिर कश्मीर पर। कट्टरपंथियों ने हमेशा मेरा विरोध किया है और मैं हमेशा ही उनके निशाने पर रहा हूं।
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ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में बृहस्पतिवार रात में होने वाली महफिल दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन की सदारत में होती है। लेकिन आबेदीन ने उर्स के मौके पर खुद बीफ कभी नहीं खाने, मुसलमानों से बीफ छोड़ने के ऐलान के साथ कहा था कि किसी भी तरह का जानवर नहीं काटा जाना चाहिए। उन्होंने तीन तलाक का भी विरोध कर दिया था। इससे वहां का एक धड़ा उनसे नाराज हो गया था और बुधवार को हुए घटनाक्रम के तहत आबेदीन के भाई अलाउद्दीन अलीमी ने दीवान की गद्दी पर स्वयं को सज्जादनशीन घोषित कर दिया था।
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षड़यंत्र के तहत आबेदीन से नाराज इस धड़े ने महफिल की रस्म आबेदीन के भाई सैयद अलीमुद्दीन अलीमी की सदारत में करवाने का मानस बनाया था। इसके तहत अलीमी को आबेदीन की गद्दी पर बैठकर अपना हक जताते हुए महफिल की रस्म अदा करवानी थी। लेकिन आबेदीन को कट्टरपंथियों के इस षड्यंत्र आ आभास हो गया।
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उन्होंने तुरंत एडीएम सिटी को पत्र लिखकर देर शाम उनके भाई सैयद अलीमुद्दीन अलीम खान, उस्मान घड़ियाली, काजी मुन्नवर, गुलाम रसूल और जराव अहमद को पाबंद भी करवा दिया ताकि वह महफिलखाने में आकर किसी तरह का विवाद खड़ा ना कर पाएं।
इस बीच आबेदीन ने महफिल शुरू होने से दो घंटे पहले आकर महफिलखाने में पहुंचकर अपनी गद्दी पर बैठ गए। दरगाह थानाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि दीवान के भाई सहित पांचों को नोटिस तामिल करवा दिया गया। अगर इसके बावजूद भी महफिल की रस्म में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गौरतलब है कि दरगार में चल रहे इस विवाद के बीच आबेदीन ने पत्रकारों से कहा था कि वे मरते दम तक दरगाह दीवान बने रहेंगे। ये अधिकार उन्हें उच्चतम न्यायालय के वर्ष 1987 में दिए आदेश के तहत मिले हैं। छोटे भाई को उन्हें इस पद से हटाने का कोई अधिकार ही नहीं है। इस तरह की हरकतें पवित्र दरगाह के लिए कलंक जैसी हैं। उन्होंने कहा कि मरने के बाद बड़ा बेटा मेरा (जैनुअल अबेदीन) उत्तराधिकारी होगा।
जैनुअल आबेदीन ने पत्रकारों से यह भी कहा कि संकीर्ण विचारधारा और कट्टरपंथियों को उनके विचार कभी पसंद नहीं आते हैं। चाहे बयान गाय पर हो या तीन तलाक पर या फिर कश्मीर पर। कट्टरपंथियों ने हमेशा मेरा विरोध किया है और मैं हमेशा ही उनके निशाने पर रहा हूं।